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"दोस्त" अब पहले वाले जैसे नही रहे ?

 "दोस्त" अब पहले वाले जैसे  नही रहे ? नमस्कार दोस्तों , आज की इस काहानी मे आज के बढते काम ,बोझ को लेकर  अपने दोस्तों के  बारे मे बताऊगा|    ० दोस्त अब पहले वाले जैसे नही रहे || ० दोस्त अब थकने लगे है ||    ०किसी का पेट निकलने लगा है  ० किसी के बाल पकने लगे हे||   ०सभी पर अब भारी जिम्मेदारी है  अब बचपना नही रहा  || ० सभी को कोई ना कोई छोटी -मोटी बिमारी है||       दिन भर  भागते -दौडते थे वो  आज रास्ते मे रूकने लगे है ||      पर ये हकीकत है | सब दोस्त अब थकने लगे है| किसी को लोन का फिक्र है तो  किसी को हैल्थ का जिक्र है ||   फुर्सत की सब को कभी है | आँखो मे अजीब सी नमी है ||   कल जो प्यार से ✍✍✍खत लिखते थे ||  वो आज जो बीमे का फार्म भरने लगे है ||      पर ये हकीकत है | सब दोस्त थकने लगा है ||   दोस्त अब वैसे नही रहे |   दोस्त कभी साथ जाते थे  खेलते कुदते थे वो   आज कहा रहने लगे है   कोई घर के बिस्तर पर || तो कोई अस्पताल के बिस्तर पर||       अतं मे कहू तो दोस्त अब थकने लगने है|     दोस्त अब पहले वाले जैसे नही रहा ||      दोस्त अब  ऐसा नही रहा कयूकि अब बचपना नही रहा |||      🙏🏾

मां की वो पाँच बाते जो मुझे आज भी खुशी के आँसू दिलाती है |

 मां की वो पाँच बाते जो मुझे आज भी खुशी के आँसू दिलाती है |       नमस्कार ,मेरे प्यारे दोस्तो  आज की इस काहानी मे ,मे आपको बताऊगा मां की वो पाँच बाते जो में उसे सोच सोच कर हंसता हूँ कि मां.....             जब जब ये सोचता हूँ मां मुझे इतनी खुशी मिलती है जैसे की मै फिर से बचकने मे आ गया हो ||     चलो आपको बताता हूँ |       पहली ,जब से , मां की पेपर देने के बाद आने पर पूछना की पेपर कैसा हुआ बेटा,पर मुझे सिर्फ एक ही बात बोलना की मां आज तो नकल पकडी गई |😁😁😁    पर जैसे ही बोलता तो मां का समझना की सच बता ,कब ,कयो नकल लेकर गया | पर कुछ दिन बाद समझ गई ,मा की नकल  पकडने का मतलब ये पूरे पूरे नम्बर का कर के आया हे पर मुझे तो बस इतना ही कहना की नकल पकडी गई |         दूसरा ,जो जब मम्मी चैकिंग के लिए आती की बेटा पढ रहा है या नही या सो गया | पर मेरा एक ही काम जैसे ही पता चलता की सीढियो से आवाज आ रही है | तो मै फटाफट सो जाता था | पर आकर बोलती थी की ये तो सो रहा है | फिर आकर उठाती ||    फिर कई बार ऐसे सोचकर देखा की मां ने अब बहुत आराम से आऊगी और पता भी नही चलने दूंगी | ओर सीढियो से छुप कर देखूगी || 

मेरे पापा जी के साथ का बचकना(पापा की वो बाते जो कभी सामने निकल कर नही आई)

मेरे पापा जी के साथ का बचकना( पापा की वो बाते जो कभी  सामने निकल कर नही आई) नमस्कार,         प्यारे दोस्तो,   आज की इस काहानी मे पापा के छुपे प्यार को बताऊगा कि कितनी बाते हमेशा छुपा के रखते है |    चलिऐ काहानी की शुरूआत करते है | Buy Now best studio helmet   पापा, सबसे पहले आपको प्रणाम जहाँ तक आपने मुझे पहुचायां |     आज में इस काहानी के माध्यम से पूरे परिवार को रूब-रूब करवाऊगा|    Buy Now👇👇👇     पापा,कया बताऊ ,आपके कम बोलने का मुझे अब समझ आया | Click Here To Buy   पापा ,जब मै छोटा था तब मुझे स्कूल तक छोड के आना और आधी छुटटी मे गेट पर खडे पाना और घर तक लेकर आना |    पापा ,जब मुझसे बैग उठ नही पाता था तब अपने कंधे पर बैग को टांग के ले जाना | हाथ से उंगली पकड़कर मुझे स्कूल पर समय तक पहुंचना और यदि मेरे से चला नही गया था तो अपने कंधे पर बैठाकर भागे-भागे पहुंचाना |       पापा ,जब कभी बारिश होती थी तब अपने तन को ना ठक कर ,मेरे उपर से ढक देते थे | कया ,बोलू आपको कया सर्दी नही लगती थी कया ??       और कया बताऊ  पापा -मम्मी के साथ जाने के समय तैयार करके मुझे ले जाते थे |    पापा जब कही  का

बुरी " संगत" ही मनुष्य को बेकार बना देती है |

  बुरी संगत ही मनुष्य को बेकार बना देती है | नमस्कार ,मेरे पॄिय दोस्तो     आज की इस काहानी में आपको बताऊंगा की संगत ही जीवन का एक पल है जिससे मनुष्य को अलग -अलग भाग मे बाटा जा सकता है |   एक काहानी है वो मे आपके साथ शेयर करूगा पर ये काहानी आपको पूरी पढनी है ओर अपने बच्चो के साथ शेयर करे |     एक पल की बात है जब में स्कूल जाया करता था |तब मां -बाप मुझे हमेशा बोलते थे कि आज कया पढा ओर ये कथन मां -बाप को  पूछना जरूर था | कयोकि उसकी संगत का पता चलता है | हर मां -बाप को पूछना चहिऐ अपने बेटा -बेटी से हर दिन की दिनचर्या|||    आज के बच्चे मां- बाप से दूर रहते है| और मां -बाप के अभाव मे कभी भी नही पूछते है कि कैसे है पर हरी गलत है ||   जो संस्कार मां बाप दे सकते है वो ओर कोई नही दे सकता| एक काहानी में पांचवी कक्षा मे पढा था उसको मे आपके साथ शेयर करूगा | चलो ये काहानी की शरूआत करता हूँ |    एक बार की बात है जब  पापा ने बोला कि 2किलो आम लाया हूँ आपके लिऐ इसे अलमारी में रख दो |   पर बच्चे को कया पता की आपकी परीक्षा ली जा रही है | उसमे पापा ने एक खराब सडा हुआ आम भी रखवा दिया|   सुबह उठा तो उसके पा

" प्रेम दो और प्रेम पाओ " अच्छे कर्म करिये लोग मान -सम्मान ही नही गले भी लगाऐगे| जैसा बौओगे तो वैसा काटाोगे (जैसा कर्म वैसा फल)

     " प्रेम दो और प्रेम पाओ " अच्छे कर्म करिये लोग मान -सम्मान ही नही गले भी लगाऐगे|       जैसा बौओगे तो वैसा काटाोगे (जैसा कर्म वैसा फल) काहानी अंत तक पढे एक दम सच्ची घटना है| शेयर भी करे |      कुछ  समय पहले की बात है ! एक गांव में एक गरीब किसान रहता था ! मेहनत और मजदूरी करके अपने परिवार का लालन पालन करता था !       किसी तरह दो पैसा कमा कर अपने परिवार की जिंदगी और अपने जिंदगी का गुजारा कर रहा था! धीरे-धीरे समय बीतता गया और किसान शरीर से बुड्ढा होने लगा      अपने मेहनत के बल पर और इमानदारी से पूरे गांव में उसका अच्छा छवि था |         गांव के लोग उसका इज्जत करते थे क्योंकि उसके अंदर गरीबी थी मगर दूसरों की सेवा दान पुण्य उसका कर्तव्य और धर्म था|       इसी वजह से वह हर किसी के दिल में राज करता था । उसका एक लड़का था जो बहुत की चंचल और नटखट था जब वह छोटा था तो गांव वाले उसके चंचलता को बचपन की नादानी समझ कर माफ कर देते थे मगर जैसे-जैसे वह बड़ा होने लगा लोग उससे परेशान होने लगे बडे दुखी थे |         किसी को कुछ भी बोल देना , बच्चों को मारना , झगड़ा करना , गांव के जानवरों को परेशा