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मेरे पापा जी के साथ का बचकना(पापा की वो बाते जो कभी सामने निकल कर नही आई)





मेरे पापा जी के साथ का बचकना(पापा की वो बाते जो कभी  सामने निकल कर नही आई)

नमस्कार,

        प्यारे दोस्तो,



  आज की इस काहानी मे पापा के छुपे प्यार को बताऊगा कि कितनी बाते हमेशा छुपा के रखते है |

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   चलिऐ काहानी की शुरूआत करते है |

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  पापा, सबसे पहले आपको प्रणाम जहाँ तक आपने मुझे पहुचायां |  

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  आज में इस काहानी के माध्यम से पूरे परिवार को रूब-रूब करवाऊगा|

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    पापा,कया बताऊ ,आपके कम बोलने का मुझे अब समझ आया |


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  पापा ,जब मै छोटा था तब मुझे स्कूल तक छोड के आना और आधी छुटटी मे गेट पर खडे पाना और घर तक लेकर आना | 

 




पापा ,जब मुझसे बैग उठ नही पाता था तब अपने कंधे पर बैग को टांग के ले जाना | हाथ से उंगली पकड़कर मुझे स्कूल पर समय तक पहुंचना और यदि मेरे से चला नही गया था तो अपने कंधे पर बैठाकर भागे-भागे पहुंचाना |
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      पापा ,जब कभी बारिश होती थी तब अपने तन को ना ठक कर ,मेरे उपर से ढक देते थे | कया ,बोलू आपको कया सर्दी नही लगती थी कया ?? 


     और कया बताऊ  पापा -मम्मी के साथ जाने के समय तैयार करके मुझे ले जाते थे |

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   पापा जब कही  कांटे -पत्थर होते थे उस समय मुझे उठाकर ओर संभाल संभाल कर ले जाते थे |

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   पापा, सोने के लिए मेरा बिस्तर लगा देते थे और देखकर बार -बार जाना की सो गया या फिर नही |

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    पापा ,आप मेरी सीढी की तरह हो| पापा मुझे आपने चलना सीखाया || यदि सीढी उच्ची -उच्ची होती थी तो अपने हाथ की सीढी बनाकर चढा देते थे |

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     पापा कया बोलू ,कभी अपनी पीढ पर बैठाकर पूरे घर मे घूमाते थे | और अपने घर को एक साथ लेकर जाते थे | हर काम करते थे अपने परिवार का|

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    कया आपका कोई काम था या नही |

  पापा कभी मुझे मेले मे ले जाते थे तो मन पंसद के गुब्बारे दिलवाते थे | और अपने लिऐ कुछ भी नही |

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   पापा उस प्यार को कया बोलू जब छोटे से हाथ से थप्पड लग जाता था तो रो के दिखाते थे |


    पापा कभी कभी आप बैड की थोडी सी जगह मे सो जाते थे | और मुझसे कुछ बोलते तक नही थे |


    पापा आप कितना त्याग करोगे |जहा से मुझे पार करने मे डर लगता था| तब अपने कंधे से बिना डरे हुऐ उसको पार कर देते थे |


      पापा आप अपनी जांब भी करते थे ओर परिवार को भी संभालते थे| 

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     कया बोलू , 

  आपके प्यार को, कुछ शब्द नही है मेरे पास जो कि में बोलू |

   जो हू बस लाखो मे एक हू वो भी सिर्फ आपके लिऐ लिऐ |

  


  अत: काहानी का निसकरस यह है कि जहा तक आपके पापा  ने आपको पहुचाया हे वो उनके बचपन का सपना था | 

     अत; आप भी अब अपना सपना तय कर लो जो कि आपके पापा ने आपके लिऐ किया | उनहे जो कुछ किया बहुत कुछ है |

     



  अत: पापा की आँखो  मे आँसू आऐ तो सोच लेना कि आप सही नही कर रहे हो | अत: मां -बाप को इतना प्यार दो कि उनको पता भी ना चले की बुढापा भी जिंदगी मे होता है |

  

     मां -बाप को साथ रखे अपने खयालो मे डालो और जहां तक आपको उन्होने पहुचाया है | अत: आप भी उनको दुनिया घुमाऐ और पूरी दुनिया दिखाऐ |



       कही भी जाओ साथ लेके जाओ अपने साथ रखो | 



जैसे कही भी जाते तो आपको उठाकर सबसे पहले चढाते थे

अब आपको, अपने मां बाप को  गाडी मे बिढाना |

  काहानी थोडी सी भी समझ आऐ तो शेयर जरूर करे |||




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.✍✍✍अनिल हटरिया




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