सच बताऊ अब अफसोस नहीं | सच बताऊ अब खामोश नही | सच बताऊ अब में वो नही , सच्ची सच्ची बताऊ अब वो रोश नही | घर में वो अफसोस नही | दिनो की अब परवाह नही , रातो में ज्यादा अब सोच नही | सच बताऊ अब जिदंगी वो खास नही | मतलबी थी दुनिया अब वो पहले दुनिया की तरह रोक नही | मना ली है मेने ये दुनिया अब तेरी वो सोच नही || अब रो या सो , मतलबी का मुझे अफसोस नही , गलती थी मेरी लाखो में , पर अभी मुझे कोई अफसोस नही || कहू ना अब अपनी वो मेरी यादे || कयो कि कदमो में वो सम्मान नही | सच बताऊ तो अब अफसोस नही | रोकी ना टोकी , ना फालतू किसी के सामने बोली | सच बताऊ अब अफसोस नहीं | सच बताऊ अब खामोश नही | सच बताऊ अब में वो नही , सच बताऊ अब अफसोस नहीं | ये भी पढे ✍🏻 ✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया ... ..
बहुत ठीक होने लग गया हूँ || बहुत दूर होने लग गया हूँ | मोहबबत के जाल से थोडा दूर हो गया हूँ | काहानी अलग लिख ली है मैने , अब चाहने वालो से भी दूर हो गया हूँ || अभी बहुत ठीक सा होने लगा हू |
बहुत ठीक होने लग गया हूँ || बहुत दूर होने लग गया हूँ | मोहबबत के जाल से थोडा दूर हो गया हूँ | काहानी अलग लिख ली है मैने , अब चाहने वालो से भी दूर हो गया हूँ || अभी बहुत ठीक सा होने लगा हू | (2024-25) के पिछले साल की 13 बीमारीयो से अभी छुट गया हूँ | अब चल पडा हू कुछ नया आयाम बनाने , सपने ही नही बस उनको साकार बनाने , चल पडा हू कुछ नया बनाने , मोहब्बत से अलग अपना संसार बनाने , बीते साल की अब याद बुलाने , बदल रहा हू मे अपना राह , अब कुछ लोगों की अपनी वो याद दिलाने , दिया हुआ मेंरा दिल से, वो बरासलेट वाले ऐकंर का छलला , जिसने तोडा था मेरा सात जन्मों वाला वादा , अब उसे दिखे गा ना अब मेरा ये सात जन्मों वाला इरादा , बहुत ठीक सा होने लग गया हूँ || बहुत दूर सा होने लग गया हूँ | मोहबबत के जाल से थोडा दूर हो गया हूँ | पीकर नही काटी रात मैने , मेहनत की आड में सैंकी है आंख मैने , पढा हू दिन रात बस अब ओर नाम कमाने , बीते साल की 13 बीमारीयो से लडकर , अब चल पडा हू कुछ नया दिखाने , बस अब हो गया हूँ नया नये जमाने में , बीते पल की ना बात बताऊ , अब आ गया हूँ कुछ अलग...