एक पुरूष थकता नही | एक पुरूष थकता नही है | उसे थकाया जाता है | वो हारता नही पर उसे हराया जाता है | वो रोता नही है पर रूलाया जाता है | तू एक मर्द है ये कहकर चुप कराया जाता है | घर की सारी जिम्मेदारी दिया जाता है | एक आंसू कया टपका दो किसी के पास , औरत है कया तू ये कहा जाता है | एक मर्द है तू ये समझाया जाता है | सब जिम्मेदारी का एहसास दिलाया जाता है | कमाना भी तू तुझे है | घर भी तुझे ही चलाना है | ये कहकर एक मर्द को हराया जाता है | एक पुरूष थकता नही है , पर फिर भी उसे थकाया जाता है | तुझे पढकर आगे जाना है | कही कलम की नौकरी तो कही मजदूरी करवाया जाता है | एक मर्द थकता नही , पर फिर भी परिवार के तानो से थकाया जाता है | ये तो सब देखा हुआ है , तू कया अलग घूमाया मुझे ऐसे ऐसी जगह तो घुमी हुई है | कहकर लोगो को भी सुनाया जाता है | अपने आप को बडा मानते है लोग , जिनकी जेब नही है दस से ज्यादा कया नोट कहकर ये लोगों को बढाया जाता है | अकसर जिन्हे देखी ही नही मेहनत की वो राते , वो अकसर रातो रात खबाबो के सपने सजाते है | मर्द थकते नही उन्हे थकाया जाता है | ये कह कहकर घर तेरे हाथ मे...
एक उम्र एक उम्र सब सीखा देती है | एक उम्र सब बता देती है | ना जाने कया कया राह बता देती है | खुले हुऐ दरवाजे को भी ताले लगा जाती है | कभी कभी ये उम्र सीखा देती है | कई मेहनत के रंग को फीका कर जाती है | कभी हथेली की लकीर मोड जाती है | कभी हाथो में हथकडी पहना देती है | एक उम्र बहुत कुछ सीखा देती है | आऐ हुऐ जिंदगी के वो दुख दर्द को भी भुला जाती है | वो उम्र कई राह ढूढ लेती है | कभी तो ये उम्र जिंदगी नई मोड ले लेती है | कभी तो ये अपने को खो देती है | उम्र बहुत कुछ ले लेती है | ये उम्र भी बहुत कुछ ले लेती है || कभी बचपन में बचपना और बचपने को जवानी मे , तो कभी जवानी में बुढापा ले आती है | उम्र हर मोड पर कुछ नया ले आती है | बीते हुऐ दर्द के पल , ये उम्र कभी खुशी में ले आती है || ये उम्र बढती हुऐ , कुछ रंग बदल देती है | कभी आंसूओं में खून तो , कभी बादलो से फूल बखेर हुऐ देखती है || ये उम्र हर दिन कुछ अलग ले बैठती है || ये उम्र कुछ अलग ले बैठती है || दिन हो जाहे रात , एक उम्र सब जाकं लेती है || मेरा हो या औरो की , ये उम्र सब कुछ बदल देती है || एक उम्र सब सीखा ...