में देखता सब कुछ हूँ , बस में कहता कुछ भी नही | विशवास है भगवान पर , विशवास है भगवान पर , ना गलत किसी को कहता हूँ| अपनी यादे अपने पास है | किसी के फालतू साथ मे ना हूँ | ना कहना चाहता हूँ किसी की , पर सुनता सभी की हूँ , में भगवान तो नही , पर भगवान के साथ जरूर. हूँ | साथ दिया मेरा बहुत बार , लटकती लटकती जिंदगी को थामा है तूने , जन्म से बडे होने एवम् सफल होने का तोहफा दिया है तुने मुझे , में देखता सब कुछ हूँ , बस कहता कुछ भी नही | कैसे कह दू में किसी को , कि करता कुछ नहीं , रहता हूँ हर बार साथ , पर दिखता कभी नही हूँ ||| में देखता सब कुछ हूँ , बस में कहता कुछ भी नही | रहता हूँ मगन अपनी दुनिया में , ना सुनता हूँ किसी गैर की बात , में चलता हूँ एकदम ऊसके ,, साथ साथ जिन्होने ऊगली पकड के चलना सिखाया | उन्होने कभी भूखा सोने ना दिया | फिर भी कभी रोने ना दिया || हंसाने के नाटक बहुत किये , पर पीछे मुडकर किसी का इंतजार ना करने दिया | जिन्होने एक पल में ना कहाँ , हमने उनके साथ आना छोड दिया || भगवान में तेरे साथ हू कहता रहा , तू सच...
मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी | मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी || मे सब जगह जीता हूँ और हर जगह जीत भी रहा हू || घमंड नही है मुझे एक पैसे का भी , कयोकि मैने इज्जत दी थी || तूने रोटी भी ना दी और मैने अपना घर भी दे दिया था | तूने पूछा भी ना था दर्द मेरा कभी , पर तूने दर्द ऐसा दे दिया था || उबलते पानी को घाव पर डाल दिया था || अकड थी बहुत तुझमे , की झुका देगे तुझे झूठी बातो में ,, की झुका देगे तुझे झूठी बातो में , पर मैने इज्जत की थी | और तुने रोटी भी ना दी थी | में जीता हूँ हर जगह जगह , और जीत भी रहा हु , हारूगा नही याद है मुझे , कयोकि मैने इज्जत दी थी || कयोकि मैने इज्जत की थी || पुछकर - पुछकर हर बात किसी से घर नही चलता , अकल नही है जिसको थोडी सी भी , वहाँ मर्द नही रूकता || कयोकि वहाँ मर्द नही रूकता || गंदे दिल में मन नही लगता || सच्ची बात में मोहबबत होती है | सच्ची बात में मोहबबत होती है | हर बार बात को दबाने से घर नही बसता , मैने कहा था उसको , रोका नही उसको कभी भी , कही पर और घर में भी , मैने क...