मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी | मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी || मे सब जगह जीता हूँ और हर जगह जीत भी रहा हू || घमंड नही है मुझे एक पैसे का भी , कयोकि मैने इज्जत दी थी || तूने रोटी भी ना दी और मैने अपना घर भी दे दिया था | तूने पूछा भी ना था दर्द मेरा कभी , पर तूने दर्द ऐसा दे दिया था || उबलते पानी को घाव पर डाल दिया था || अकड थी बहुत तुझमे , की झुका देगे तुझे झूठी बातो में ,, की झुका देगे तुझे झूठी बातो में , पर मैने इज्जत की थी | और तुने रोटी भी ना दी थी | में जीता हूँ हर जगह जगह , और जीत भी रहा हु , हारूगा नही याद है मुझे , कयोकि मैने इज्जत दी थी || कयोकि मैने इज्जत की थी || पुछकर - पुछकर हर बात किसी से घर नही चलता , अकल नही है जिसको थोडी सी भी , वहाँ मर्द नही रूकता || कयोकि वहाँ मर्द नही रूकता || गंदे दिल में मन नही लगता || सच्ची बात में मोहबबत होती है | सच्ची बात में मोहबबत होती है | हर बार बात को दबाने से घर नही बसता , मैने कहा था उसको , रोका नही उसको कभी भी , कही पर और घर में भी , मैने क...
आखिर दाग लग ही जाते है | सफेद रंगो मे ही नही, गहरे रंगो में भी दाग दिख जाते है | सच बताऊ तो तुम चाहे कितना अच्छा बन लो कुछ लोग दाग लगा ही देते है | तुम चाहे दिल जान लगाकर चाह लो , लोग दुसरो की तरफ रूह मोड ही लेते है | में अपनी कहानियों में ही नही लिखता ब्लकि अपना दर्द , हर दर्द को वो लोग झूठा बता ही देते है | कुछ लोग सच्चे को झूठा बता ही जाते है | दिन को भी रात बता देते हे | आखिर दाग लग ही जाते है | गहरे रंगो में भी नजर पड जाते है | अपनी पहुँच उच्ची रख करके लोगो . को बेकूफ समझ जाते है | कभी कभी सफेद कपडों में ही नही , गहरे रंगों मे भी दाग पड जाते है || कभी कभी लोग मीठे बनकर, एहसान करने लग जाते है | सच्ची बात तो ये है कि , मुर्ख़ लोग भी सब समझ जाते है | आखिर दाग लग ही जाते है | सफेद रंगो मे ही नही, गहरे रंगो में भी दाग दिख जाते है | कैसे कह दू , फर्क नही पडता दाग से , आखिर लोग दगा देकर भी अपने घाव को छूपा जाते है || आखिर लोग आखमिचोली खेल ही जाते है | धोखा देने की हद ही नही , अपने आप को राम से बडा मान जाते है | आखिर लोग दाग...