एक उम्र एक उम्र सब सीखा देती है | एक उम्र सब बता देती है | ना जाने कया कया राह बता देती है | खुले हुऐ दरवाजे को भी ताले लगा जाती है | कभी कभी ये उम्र सीखा देती है | कई मेहनत के रंग को फीका कर जाती है | कभी हथेली की लकीर मोड जाती है | कभी हाथो में हथकडी पहना देती है | एक उम्र बहुत कुछ सीखा देती है | आऐ हुऐ जिंदगी के वो दुख दर्द को भी भुला जाती है | वो उम्र कई राह ढूढ लेती है | कभी तो ये उम्र जिंदगी नई मोड ले लेती है | कभी तो ये अपने को खो देती है | उम्र बहुत कुछ ले लेती है | ये उम्र भी बहुत कुछ ले लेती है || कभी बचपन में बचपना और बचपने को जवानी मे , तो कभी जवानी में बुढापा ले आती है | उम्र हर मोड पर कुछ नया ले आती है | बीते हुऐ दर्द के पल , ये उम्र कभी खुशी में ले आती है || ये उम्र बढती हुऐ , कुछ रंग बदल देती है | कभी आंसूओं में खून तो , कभी बादलो से फूल बखेर हुऐ देखती है || ये उम्र हर दिन कुछ अलग ले बैठती है || ये उम्र कुछ अलग ले बैठती है || दिन हो जाहे रात , एक उम्र सब जाकं लेती है || मेरा हो या औरो की , ये उम्र सब कुछ बदल देती है || एक उम्र सब सीखा ...
सच बताऊ अब अफसोस नहीं | सच बताऊ अब खामोश नही | सच बताऊ अब में वो नही , सच्ची सच्ची बताऊ अब वो रोश नही | घर में वो अफसोस नही | दिनो की अब परवाह नही , रातो में ज्यादा अब सोच नही | सच बताऊ अब जिदंगी वो खास नही | मतलबी थी दुनिया अब वो पहले दुनिया की तरह रोक नही | मना ली है मेने ये दुनिया अब तेरी वो सोच नही || अब रो या सो , मतलबी का मुझे अफसोस नही , गलती थी मेरी लाखो में , पर अभी मुझे कोई अफसोस नही || कहू ना अब अपनी वो मेरी यादे || कयो कि कदमो में वो सम्मान नही | सच बताऊ तो अब अफसोस नही | रोकी ना टोकी , ना फालतू किसी के सामने बोली | सच बताऊ अब अफसोस नहीं | सच बताऊ अब खामोश नही | सच बताऊ अब में वो नही , सच बताऊ अब अफसोस नहीं | ये भी पढे ✍🏻 ✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया ... ..