सब भूल चूका हूँ |
कई गम पी चुूका हू |
ऐहसान ही नही एहसास कर चुका हूँ ,
बस अब सब भुल चुका हूँ |
हु हु सब भुल चुका हूँ |
मन नही करता किसी से बात करना ,
बस अपने राह पर चल चुका हूँ |
कामयाब नही हुआ हु अभी ,
बस कमाने निकल चुका हूँ |
क ई क ई जगह तो ठोकरे से गिर चुका हूँ |
पर अब सब भुल चुका हूँ ||
आदत नही बनना किसी की ,
अब ये बेमतलब वाला धोखा ,
बहुत सहन कर चुका हू |
बस अब सब भुल चुका हूँ |
ना चाहकर भी अपने हक को मानने
के लिये छोड चुका हूँ ||
कई कई बार तो खुद जहर के प्याले पी चूका हूँ|
ना जाने अब कितना मजबूत हो गया है ||
दिल जहाँ से धडकना था |
वहाँ से अब वो निकल चुका है ||
क ई बार तो रोने ही नही दिया है
उसके सामने मजबूत हो चुका हूँ ||
अब सब भुल चुका हूँ ||
ना जाने में अब कोन से रास्ते से निकल रहा हू ||
क ई बार तो जगह ही नहीं ,
पर बहुतो के दिल पे राज कर चुका हूँ ||
चेहरे सुंदर नही बस केवल दिलो की
धडकन को पहचान चुका हूँ ||
बस अब सब भूल चूका हूँ |
कई कई गम के प्याले पी चुूका हू |
ना जाने कई रास्ते अटके ,
पर वो अब में खोल चूका हूँ ||
पर वो अब में खोल चूका हूँ ||
सब भूल चूका हूँ |
क ई गम पी चुूका हू |
ऐहसान ही नही एहसास कर चुका हूँ ,
बस अब सब भुल चुका हूँ |
हु हु अब मै वो सब भुल चुका हूँ |
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