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ये उम्र सब कुछ बदल देती है || एक उम्र सब सीखा देती है | एक उम्र सब बता देती है |

 एक उम्र 

एक उम्र सब सीखा देती है |

एक उम्र  सब बता देती है |

ये उम्र सब कुछ बदल देती है ||  एक उम्र सब सीखा देती है |  एक उम्र  सब बता देती है |


ना जाने कया कया राह बता देती है |

खुले हुऐ दरवाजे को भी ताले  लगा जाती है |

कभी कभी ये उम्र सीखा देती है |

कई मेहनत के रंग को फीका कर जाती है |

कभी हथेली की लकीर मोड जाती है |

कभी हाथो में हथकडी पहना देती है |

एक उम्र बहुत कुछ सीखा देती है |

आऐ हुऐ जिंदगी के वो दुख दर्द को भी भुला जाती है |

वो उम्र कई राह ढूढ लेती है |

कभी तो ये उम्र जिंदगी नई मोड ले लेती है |

कभी तो ये अपने को खो देती है |

उम्र बहुत कुछ ले लेती है |

ये उम्र भी  बहुत कुछ ले लेती है ||

कभी बचपन में बचपना और बचपने को जवानी  मे ,

तो कभी जवानी में बुढापा ले आती है |

उम्र हर मोड पर कुछ नया ले आती है |

बीते हुऐ दर्द के पल ,

ये उम्र कभी खुशी में ले आती है ||

ये उम्र बढती हुऐ ,

कुछ रंग बदल देती है |

कभी आंसूओं में खून तो ,

कभी बादलो से फूल बखेर हुऐ देखती है ||

ये उम्र हर दिन कुछ अलग ले बैठती है ||

ये उम्र कुछ अलग ले बैठती है ||

दिन हो जाहे रात ,

एक उम्र सब जाकं लेती है ||

मेरा हो या औरो की ,

ये उम्र सब कुछ बदल देती है ||

एक उम्र सब सीखा देती है |

एक उम्र  सब बता देती है |


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✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया

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