तू मुझसे प्यार कयो करती है , कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता है | तू मुझसे रूठ कयो जाती है , मुझे तो मनाना नही आता |
तू मुझसे प्यार कयो करती है ,
कयोकि मुझसे तो निभाना ही नही आता है |
तू मुझे रूठ कयो जाती है ,
मुझे तो मनाना नही आता |
हर बार तेरे झूठे नखरे को उठाना नही आता |
गलती को गलत ही कह देता हूँ |
झूठ को सच कहना नही आता |
तूजे कया बताऊ ,
हर बात को बताना नही आता |
तू मुझसे प्यार का कयो करती है ,
कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता |
झूठे को सच बताना नही आता ,
हर बार एक ही बात को बताना नही आता |
बस बोल दिया है प्यार तुमसे है
रोज रोज मुझे कहना नही आता ||
मेरे रास्तों में मोड है बहुत ,
कस के पकड लो कयोकि मुझे छोडना नही आता ||
सुंदर तो बहुत लोग है आस और पास में
पर तेरे को गंदा कहना नही आता ||
तू मुझसे प्यार कयो करती है ,
कयोकि मुझे तो निभाना नही आता है |
तू मुझे रूठ कयो जाती है ,
मुझे मनाना नही आता ||
सच्ची बात है ,एक साथ हू
सच्ची बात है ,एक साथ हू
पर मुझे किसी को झुकाना नही आता ,
मानता हू, में रहूंगा अकेला
पर हर बात को दिल पर रखकर सोना नही आता |
चल के उठ पडता हूँ हर
वो गैरो के पास से ,
कयोकि हर बार बेजजती नही सह पाता| |
कुछ समय तक रहता हूँ उम्मीदों में ,ही
मे कयो कि ,मुझे पता है की
एक ही पुलिया पार करने पर समुंदर नही आता ||
हर बात को बताना नही आता |
तू मुझसे प्यार का कयो करती है ,
कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता |
बस राह साफ रखता हूँ ,
दिखाना नही आता ||
बस राह साफ रखता हूँ ,
दिखाना नही आता ||
कितनी बार किसी को मनाऊ ,
कयोकि मुझे तो बार बार निभाना ही नही आता |
तू मुझसे रूठ कयो जाती है ,
मुझे मनाना नही आता |
हर बार तेरे झूठे नखरे को उठाना नही आता |
गलती को गलत ही कह देता हूँ |
झूठ को सच्च कहना नही आता |
तू मुझसे प्यार कयो करती है ,
कयोकि मुझे तो निभाना नही आता है |

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