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4 दिन की जिंदगी है , बस कुछ तो अच्छा किजिऐ ,

         

         कविता


    न चादर बड़ी कीजिए ,

    न  ख्वाहिशें दफन कीजिए ,

    4 दिन की जिंदगी है , 

    बस चैन  से बसर कीजिए,

4 दिन की जिंदगी है , बस कुछ तो अच्छा किजिऐ ,


    ना परेशान किसी को कीजिए ,

    ना हैराण किसी को कीजिए, 

     कोई लाख गलत भी बोले, 

     बस मुस्कुरा कर छोड़ छोड़ दीजिए ,

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      न  रूठा किसी से कीजिए ,

      न झूठा वादा किसी से कीजिए ,

     कुछ फुर्सत के पल निकालिए ,

     कभी खुद से भी मिला कीजिए ,

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    कीजिए ||


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✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया

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