तेरे ख्वाब थे और मेरे सपने , मेने दिन रात एक थी , सपने सोने नही देते थे | दिन में तौ कहा रातो को भी जगा देते थे | उठ और चल कर ,मेहनत कर तुझे बहुत आगे जाना है | लोगों की टोली में थोडा अलग सा चल, लोगों को प्यार दे मगर धोखा मत दे | साफ इंनकार कर कह दे पर किसी के साथ धोखा मत कर , उपर वाला है सब देख रहा है | थोडा कम खा ले पर किसी का मार के मत खा | ये जिंदगी तो बहुत छोटी है | पर लंबी लगने में समय नही लगता | चक्र ऐसे चलेगा पर समझ नही पाएगा | मन में भैर रहेगा पर बता नही पाएगा | खबाब तो बहुत है , पर सपने आसमान से उपर , रातो को जाग जाग कर पहरा दे रहे है | मुशिकल वकत में भी अपनो से जुडे रहे है | ना किसी का लिया ! पर सपने सोने नही दे रहे है | तेरे ख्वाब थे और मेरे सपने , मेने दिन रात एक थी , गलत नही किया बस , जिंदगी ने सोने भी नही दिया | सच्चा रहा मगर फालतू किसी के उपर हसने भी नही दिया | रात हो या दिन , आंखो को भी सोने ना दिया | तेरे खबाव थे मगर मेरे सपने , हर हालत में आगे बढना है | कमाने की भी ललक थी | पर ना किसी को हमारी भनक थी | हर आदमी ने सोचा था , नही कर पाऐगा , B...
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