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घर बदला है मैने , परिवार बदला है मैने , धोखे से अच्छा सच्चा साथी चुना है मैने इसलिये घर बदला है मैने , और बदला है परिवार मैने , और बदला है प्यार मेंने |||| ..

 घर बदला है मैने ,

परिवार बदला है मैने ,

धोखे से अच्छा 

सच्चा साथी चुना है मैने ,

घर बदला है मैने ,  परिवार बदला है मैने ,  धोखे से अच्छा   सच्चा साथी चुना है मैने इसलिये घर बदला है मैने ,  और बदला है परिवार मैने ,  और बदला है प्यार मेंने ||||  ..


इतिहास में मैने दिवारो पर 

देशभकतो के नाम देखे थे ||

कडी धूप में मैने अपने बाप की 

परिक्षा होती देखा है मैने |

कैसे कह दू साथ दिया है भगवान नै ,

मोदे पड पड रोते देखा है मेंने ,

चाल नही फट रही थी ,

एक नबंर की वजह से  जाब 

लगते लगते छूटटती देखी है मेंने,

ताने देणे वालो के आगे ,

काम मे आड लगाकर रोकते देखा है मेंने ,

कर्मो की मायाजाल के उपर ,

गरीबी का जाल देखा है मेंने ,

दर दर ठोकरे खाई है ,

कैसे कह दू सफल रास्ते 

मिलते थे मुझे  ||

आग के आगे दोडता भी देखा है मेंने ,

घर में हुऐ अंधेरे को घटते देखा है मेंने,

रूपया रूपया इकटठा करते मां - बाप 

को देखा है मेंने ,

मुडे होऐ नोटो से मेरी फीस भरते 

देखा है मेंने ,

स्कूल की आध्धी छूटटी 

मे घर की तरफ भागते देखा है मेंने ,

फीस ना आने पर कलाश मे  दरवाजे आगे 

खडे होके देखा है मेंने,

परिवार बदला है मेंने ,

गंदे लोगो से हट कर अच्छे 

काम करने की सोचा है मेंने ,

आज कह देते है लोग ,

किस्मत अच्छी हे तेरी अनिल हटरिया ,

पर ये कौन जाने कांटे वाली लकडी 

से चुल्हा जलाया है मेंने ,

मजदूरी कर कर ,दस दस रूपये की 

चुडिया बेचकर कैसे घर को चलाया है उनहोने ,

बिना वाहन के बसो में सामान रख रख कर 

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काम चलाया है ,

सफर ये जिदगी का ,

कैसे अजमाया है |

आंखो से आँसू आऐ 

जब मां ने घर के बारे मे बताया है ,

बचपन में कैसे बेटा हमने कमाया था |

लगन लगी थी कमाने ,

ललक लगी अपना घर बनाने की ,

तुम सभी बहन -भाई इकटठा 

होकर घर को चलाने की ,

बाहर से मां बापू के कमाने की ,

आंखो से आँसू आऐ   जब मां ने घर के बारे मे बताया है ,  बचपन में कैसे बेटा हमने कमाया था |  लगन लगी थी कमाने ,  ललक लगी अपना घर बनाने की ,  तुम सभी बहन -भाई इकटठा   होकर घर को चलाने की ,  बाहर से मां बापू के कमाने की ,


तरककी नही सिर्फ घर चलाने की ,

पैसा नही केवल बचचो को पढाने की ,

जीवन ठीक से चलाने की ,

खूद का घर बनाने की ,

ये आश सी जवानी की ,

घर बदला था मेंने ,

परिवार बदला था मेंने ,

ताने सहे थे मैने ,

मेबजह लोगों के आगे झूक जाने की 

वजह से  बदला था घर मेंने ,

बदला था प्यार मेंने ,

कैसे बोल दू की 

धोखा नही मिला ,

आँखो में धुल के गोचे मिले थे मुझे ,

इसलिऐ घर बदला है मैने ,

परिवार बदला है मैने ,

सच्चे प्यार का साथ नही मिला था ,

तब ही बदले थे मैने  आमजने ,

अब सब छोडकर बदल दिये है |

परिवार मैने ,

घर नही चलाया उन्होने 

 तो बदल दिये मेंने अपने आशियाने ,

इसलिये घर बदला है मैने ,

और बदला है परिवार मैने ,

और बदला है प्यार मेंने ||||

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✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया


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