उसे इंतजार था कि में आऊगा |
उसे मेरी बात याद थी कि में उसे मनाऊगा|
हर बार की तरह फौन को बंद किया था ,
सौचा था कि इस पल भी में मनाऊगा |
फिर सोचा था कुछ और , किया था कुछ और,
पल पल याद थी उसे मेरी ,जुबानी
पर अबकी बार करवा चौथ की मांग में किसी और से सजावाऊंगा |
माथे पर मेरी बिंदी ,मांग में सिंदूर कोई और से ही भरवाऊगा |
तिलक मेरे सिर पर और मेरे, अब किसी और से ही निकलवाऊगा |
हर बार की तरह अब याद ना कभी आऊगा |
छोडा सा उस मोड पे ,अब वो वकत दुबारा ना दिलाऊगा |
उसे इंतजार था कि में आऊगा |
उसे मेरी बात याद थी कि में उसे मनाऊगा|
पर अबकी बार समझा कुछ गलत था ,
कयोकि अब कसम खाई थी की अब फोन दुबारा कभी नही
मिलाऊगा |
बदले थे सकंट के रास्ते मैने ,
पर अब अपमान नही सहन कर पाऊगा |
जा जा औरो की जिंदगी ,
अभी में ना तुमसे व्रत करवाऊगा |
जा जा कही जा अब ना तुमसे अपना हक बनाऊंगा |
याद की बात नही ,
अब तो में वो राह ही दिखाऊगा |
काहनी में लिखता हू पर बहुत कुछ ,
काहानियां तुझपे ही बनाऊगा ||
दिल से लिखूगा ,कहानियां तेरी
प्यार तो में वैसा ही रखूगा अब उनके लिऐ ,
पर अब साथ तेरा मे कभी ना रहूंगा |
जा जा जी ले जिंदगी में तो तुझे याद नही आऊगा |
वकत पडे पर धोखा देने वालो को ,
ना ना ओ ना अब में गले नही लगाऊगा ,
वाह रे जिंदगी ,जी ले तू मांग में सिंदूर डालकर ,
पर अब वो मांग में मे ना आऊगा |||
और उसे इंतजार था कि में आऊगा |
हर बार की तरह गले लगाऐगा |
पर याद तो मुझे है कि जिस मोड से वापिस मुडे थे |
अब उस मोड पर दोबारा नही जाऊंगा ||
निकले हुऐ आँसू ,और ढके और तुच्छ लोगों को
दोबारा दर्शन नही दे पाऊगा ||
उसे इंतजार था कि में आऊगा |
उसे मेरी बात याद थी कि में उसे मनाऊगा|
हर बार की तरह फौन को बंद किया था ,उसने
अब सौचा था कि इस पल में भी में ही मनाऊगा |
काहानी कुछ और हो गई ,
घटना घटी थी पर रानी कोई और हो गई ||
इन अंधेरी रातो में काहानी कुछ और
हो गई |
बीती हुई मुलाकाते सुनी हो गई |
मेरी तो जान अब एक नंबर की हो गई |
झूठी से तो ये अच्छी है कयोकि इसने मुझे लिखकर
अपनी काहानी तो बता दी |
अनिल संग उसकी मेंरी दोस्ती सी तो हो गई |
काहानी कुछ और थी पर रानी कुछ और सी हो गई |
जिससे याद था सब मेरा फोन का पासवर्ड ,
अब वो किसी ओर की हो गई है |
काहानी तो अच्छी थी ,
पर अब वो रानी किसी और की हो गई है |
जिससे याद था, इंतजार था कि में आऊगा |
अब उसे तो कैसे रहेगी मेरी बात याद
कि में उसे मनाऊगा|
कयोकि हर बार की तरह फौन को बंद किया था ,
उससे कया पता था कि में रानी किसी और को बनाऊगग||
उसे इंतजार था कि में आऊगा |
उसे इंतजार था कि में आऊगा |
उसे मेरी बात याद थी कि में उसे मनाऊगा|
पर काहानी कुछ और सी हो गई
पर काहानी कुछ और सी हो गई |||||
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