सपने है बस सोने नहीं देते हे | तेरे ख्वाब है और मेरे सपने , इसीलिये रोने नही देते है ..... इसीलिये रोने नही देते है ...
तेरे ख्वाब थे और मेरे सपने ,
मेने दिन रात एक थी ,
सपने सोने नही देते थे |
दिन में तौ कहा रातो को भी जगा देते थे |
उठ और चल कर ,मेहनत कर
तुझे बहुत आगे जाना है |
लोगों की टोली में थोडा अलग सा चल,
लोगों को प्यार दे मगर धोखा मत दे |
साफ इंनकार कर कह दे
पर किसी के साथ धोखा मत कर ,
उपर वाला है सब देख रहा है |
थोडा कम खा ले पर किसी का मार के मत खा |
ये जिंदगी तो बहुत छोटी है |
पर लंबी लगने में समय नही लगता |
चक्र ऐसे चलेगा पर समझ नही पाएगा |
मन में भैर रहेगा पर बता नही पाएगा |
खबाब तो बहुत है ,
पर सपने आसमान से उपर ,
रातो को जाग जाग कर
पहरा दे रहे है |
मुशिकल वकत में भी अपनो से
जुडे रहे है |
ना किसी का लिया !
पर सपने सोने नही दे रहे है |
तेरे ख्वाब थे और मेरे सपने ,
मेने दिन रात एक थी ,
गलत नही किया बस ,
जिंदगी ने सोने भी नही दिया |
सच्चा रहा मगर फालतू किसी
के उपर हसने भी नही दिया |
रात हो या दिन ,
आंखो को भी सोने ना दिया |
तेरे खबाव थे मगर मेरे सपने ,
हर हालत में आगे बढना है |
कमाने की भी ललक थी |
पर ना किसी को हमारी भनक थी |
हर आदमी ने सोचा था ,
नही कर पाऐगा ,
अकेला कर ही कया पाऐगा ,
पर सपने थे मेरे आंखो में और दिल मैं
बहुत बड़ी बडी आस ,
मे रहता था बिना किसी फालतू लोगो के साथ ,
उठ जाता था बिना अलार्म के ,
बिना किसी के सोच के ,
सपने थे हजार ,पर लाखो में
मिला था मां - बाप का साथ ,
कहते थे लोग कया जानता है ,ये
समझा देगे इसको ,
ऐसा उलझेगा की उठ नही पाएगा ,
रोता रहेगा मगर आंशू नही आऐगा |
करेगे ऐसा की दिन भी रात सी लगेगी ,
असर, रहेगा पर भुल नही, पाऐगा .
पर उनको कया पता था की
इसके सपने ऐसे थे कि इसे सोने
नही देते है !
तुम कया बताओगे इसे ,
मेरे काम मुझे रोने नही देते है |
समय कया देखू पराये को अपने होने नही देते है |
चलाता हू नाव वाली किशतिया ,
समुंद की गहराईयो पर , पर वो पानी
आगे जाने नही देते है !
लगे रहे खुब बढने के लीऐ ,
सपने है बस सोने नहीं देते हे |
बस ये
सपने है बस सोने नहीं देते हे |
तेरे ख्वाब है और मेरे सपने ,
इसीलिये रोने नही देते है .....
इसीलिये रोने नही देते है .....
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