मै एक मर्द हूँ |
मै एक मर्द हूँ |
समझता हूँ सब
पर डरता किसी से नही ,
बिना बोले भी चाहता हूँ |
पर जिसके दिल पर राज करे ,
उसका घर सजाता हूँ |
में एक मर्द हूँ ,
हर घर का एक दर्द सहता हूँ |
ना चाहकर भी कभी कभी दुख ले लेता हूँ |
सच में नही झूठ को पकड लेता हूँ |
में एक मर्द हूँ ,
किसी की ना बेवजह सहता हूँ |
जो दुखाऐ दिल ,
फिर भी अच्छे से समझाता हूँ |
में एक मर्द हूँ ,
हर बात जानता हूँ ,
अनजान नही बस जिंदगी के
लिऐ अनजान बन जाता हूँ ||
में एक मर्द हूँ ,
कभी कभी बेवजह सह जाता हूँ ||
घर में निकम्मा ,
मां का लाडला ,
बहन का गुस्सा ,
पिता का प्यारा और
भाई का दोस्त भी
कहलाता हु ,
घर और घरो से कमाने के लिऐ निकल जाता हूँ |
कभी कभी बिना कुछ कहे भी ,
लोगो के दुख ले जाता हूँ ,
मर्द हूँ बस सब सह जाता हूँ ||
मर्द हूँ बस सब सह जाता हूँ ||
कभी कभी तो भुखा भी सो जाता हूँ|
घर को खडा रखने के लिऐ ,
कभी कभी दो रूपये के आदमे के सामने
भी हाथ जोड जाता हूँ |
मर्द हूँ बस ,
सब सह जाता हूँ ||
जिंदगी में धकके ,मुकके ,
गदारी के सिकको के नीचे
मे चला जाता हूँ !
मर्द हू बस कही कही तो
रोना होता हैं पर वहाँ भी हंस जाता हूँ ||
मर्द हू बस सब सह जाता हूँ ||
कभी 2 तो घर से बाहर जाने के लिऐ
भी कतराता हूँ |
घर को चला पाऊगा या नही ,
फिर भी जोश को भर कदम उठा लेता हूँ ||
मजबूत हूँ बस घर की कमजोरीयो से डर जाता हूँ |
लोग ताने देगे ,
लोग तेरा अपमान करगे ,
फिर भी सब सह जाता हूँ ,
में एक मर्द हु
इसलिए सब सह जाता हूँ |
गाडी में सीट नही पर
अपने परिवार के लिये ,
खुद धरती में सो जाता हूँ ||
कभी कभी तो भुखा भी सो जाता हूँ ||
मै एक मर्द हूँ ,
इसलिए सब कहने से भी डरता हूँ ||
जहाँ गलत नही तो वहाँ
फिर में कभी ना डरता हूँ ||
मै एक मर्द हूँ ,
में एक मर्द हूँ इसलिए
फालतू किसी की ना कहता हू ..
मै एक मर्द हूँ |
समझता हूँ सब
पर डरता किसी से नही ,हू
बिना बोले भी चाहता हूँ |
पर जिसके दिल पर राज करे ,
उसका घर सजाता हूँ |
में एक मर्द हूँ ,
में एक मर्द हूँ ,
इसलिए सब सह जाता हूँ ||
...
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