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काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती , अगर सच्ची चाहती होती तो मन को भी बहला देती , काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती ||

 काश तू कंधे पर हाथ तो  रख देती , अगर सच्ची चाहती  होती  तो मन को भी बहला देती , काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती || किस्मत की बात नही है , कसम होती हो ऐसी प्यार की ,  तो रूला के ही कयो जाती || तन्हाई के सफर से ही पहले   कयो ना अकेले छोड दिये दी  होती , अगर प्यार  नहीं होती , तो फिर तुम मुझसे नजरे को कयो ही ना चुरा ली होती || कयो ना चौखट पर इंतजार करता ,में  और कयो ही रात में खबाब लेता || घर के दीप को मे कयो ना मे प्रज्वलित करता || कसम झूठी होती तो, फिर में इंतजार कयू करता || काहानी मेरी है  पर फिर भी मे  कयो ही  किसी के दिल से दिल लगा लेता || काश तू कंधे पर हाथ तो  रख देती , अगर सच्ची चाहती  होती  तो मन को भी बहला देती , आदत मेरी बुरी है कि में  लिख देता हूँ , आदत मेरी बुरी है कि में  लिख देता हूँ , हर तरह के मोड की जिंदगी को सोख लेता हूँ || तू दर्द ना दी होती तो , में एक और मोड ना लेता होता || जिंदगी के मेरे कदम मेरे थोडे से  और तेज होते || तू नही चाहती तो , सनम कंधे अकसर बराबर तो रहते || मानूग...

तुझपे हक ही नही है मेरा , तो तेरी मेरी बात कैसी , तू जताती ही नही तो मेरी लाडली कैसी ,

 तुझपे  हक ही नही है  मेरा , तो तेरी मेरी बात कैसी , तू जताती ही नही तो मेरी लाडली कैसी ,  तुझसे बात ही नही मेरी , तब तो तेरा मेरा  इंतजार ही नही , तेरा दिल नहीं है तो  मेरा लगाव ही  कैसा || तू चाहती ही नही तो इंतजार कैसा || तू सपने देखे नये नये , तो अपनो मे  ही कयो नही है दिखते है  अपने || तुझपे  हक ही नही है  मेरा , तो तेरी - मेरी  बात कैसी , तू जताती ही नही तो साथ कैसे , तू मानती नही तो  मनाता फिर उसको कैसे || तेरे दिल में जगह ही नही , तो मेरा हक कैसे , चाहत नही रखी दिल में तो तेरा दिल कैसा , तुझपे  हक ही नही है  मेरा , तो बात कैसी , तूझे बोलू ही नही , तो तेरी मेरी जिंदगी कैसी || तुमझे शर्म ही नही तो , मेंरा दिल फिर कैसा ||| तुझपे  हक ही नही है  मेरा , तो बात ही  कैसी , तू जताती ही नही तो  मेरी लाडली फिर कैसी ,  तुझसे बात ही नही मेरी , तब तो तेरा- मेरा  इंतजार ही नही , तेरा दिल नहीं है तो  फिर मेरा लगाव ही  कैसा || तुझपे  हक ही नही है  मेरा , तो तेरी मेरी बात क...

में मतलबी नही , पर मुझे बस बना दिया | में समझादार नही था , पर मुशिकलो ने बस समझा दिया ,

 में मतलबी नही , पर मुझे बस बना  दिया | में समझादार नही था , पर मुशिकलो ने बस समझा दिया , दिल दिया था बेमतलब , लोगों ने इन्कार कर दिया  || चाहां था बहुत पर , लोगों ने तो धोखा दे दिया था || में मतलबी नही था , पर मुझे मतलबी बना दिया था || हर जगह से रूके हुऐ थे बेमतलब , पर ठीक जगह पर  ठहरना सीखा दिया था || साथ - सभी का दिया था, पर लोगो ने तो मिट्टी में ही मिला दिया था || नजर कया उठाऐ ऐ मेरे दोस्त , गददारो से मिलवा दिया था || ये अनिल हटरिया है जनाब , सब जानता था पर सब्र ने सब कुछ रूकवा दिया था ! में मतलबी तो नही था | पर लोगो ने मतलबी बना दिया था ||| हरकत से बाज नही थे लोग , अपने आप से उपर समझकर बैठे थे , चैन की जिंदगी जी रहा था  पर गददारो ने तो  प्लान कर रखा था || मतलबी लोगो ने  तो जाल बिछा रखा था | पर ताकतवर लोगो ने तो  सिर झूका रखा था | में मतलबी तो नही , पर मुझे बस बना  दिया था | में समझादार तो नही था , पर मुशिकलो ने बस समझा दिया था | हर बार की आदत थी , मुसकुराकर  छोडने की ||  पर अबकी बारी तो  ताकत थी बस लडने की , कयोकि में मतलब...

में देखता सब कुछ हूँ , बस में कहता कुछ भी नही | विशवास है भगवान पर ,

 में देखता सब कुछ हूँ , बस में  कहता कुछ भी नही | विशवास है भगवान पर , विशवास है भगवान पर , ना गलत किसी को कहता हूँ|  अपनी यादे अपने पास है | किसी के फालतू साथ मे ना हूँ | ना कहना चाहता हूँ किसी की , पर सुनता सभी की हूँ , में भगवान तो नही , पर भगवान के साथ जरूर. हूँ | साथ दिया मेरा बहुत बार , लटकती लटकती जिंदगी को थामा है तूने , जन्म से बडे होने एवम् सफल होने  का तोहफा   दिया  है तुने मुझे , में देखता सब कुछ हूँ , बस कहता कुछ भी नही | कैसे कह दू में किसी को  , कि करता कुछ नहीं , रहता हूँ हर बार साथ , पर दिखता कभी  नही हूँ ||| में देखता सब कुछ हूँ , बस में  कहता कुछ भी नही | रहता हूँ मगन अपनी दुनिया में , ना सुनता हूँ किसी गैर की बात , में चलता हूँ एकदम ऊसके ,, साथ साथ  जिन्होने ऊगली पकड के चलना सिखाया | उन्होने कभी भूखा सोने ना दिया | फिर भी कभी रोने ना दिया || हंसाने के नाटक बहुत किये , पर पीछे मुडकर किसी का इंतजार ना करने दिया | जिन्होने एक  पल में ना कहाँ , हमने उनके साथ आना छोड दिया || भगवान में तेरे साथ हू कहता रहा , तू सच...