काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती , अगर सच्ची चाहती होती तो मन को भी बहला देती , काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती ||
काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती , अगर सच्ची चाहती होती तो मन को भी बहला देती , काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती || किस्मत की बात नही है , कसम होती हो ऐसी प्यार की , तो रूला के ही कयो जाती || तन्हाई के सफर से ही पहले कयो ना अकेले छोड दिये दी होती , अगर प्यार नहीं होती , तो फिर तुम मुझसे नजरे को कयो ही ना चुरा ली होती || कयो ना चौखट पर इंतजार करता ,में और कयो ही रात में खबाब लेता || घर के दीप को मे कयो ना मे प्रज्वलित करता || कसम झूठी होती तो, फिर में इंतजार कयू करता || काहानी मेरी है पर फिर भी मे कयो ही किसी के दिल से दिल लगा लेता || काश तू कंधे पर हाथ तो रख देती , अगर सच्ची चाहती होती तो मन को भी बहला देती , आदत मेरी बुरी है कि में लिख देता हूँ , आदत मेरी बुरी है कि में लिख देता हूँ , हर तरह के मोड की जिंदगी को सोख लेता हूँ || तू दर्द ना दी होती तो , में एक और मोड ना लेता होता || जिंदगी के मेरे कदम मेरे थोडे से और तेज होते || तू नही चाहती तो , सनम कंधे अकसर बराबर तो रहते || मानूग...