तुझपे हक ही नही है मेरा ,
तो तेरी मेरी बात कैसी ,
तू जताती ही नही तो मेरी लाडली कैसी ,
तुझसे बात ही नही मेरी ,
तब तो तेरा मेरा इंतजार ही नही ,
तेरा दिल नहीं है तो
मेरा लगाव ही कैसा ||
तू चाहती ही नही तो इंतजार कैसा ||
तू सपने देखे नये नये ,
तो अपनो मे ही कयो नही है दिखते है अपने ||
तुझपे हक ही नही है मेरा ,
तो तेरी - मेरी बात कैसी ,
तू जताती ही नही तो साथ कैसे ,
तू मानती नही तो
मनाता फिर उसको कैसे ||
तेरे दिल में जगह ही नही ,
तो मेरा हक कैसे ,
चाहत नही रखी दिल में तो
तेरा दिल कैसा ,
तुझपे हक ही नही है मेरा ,
तो बात कैसी ,
तूझे बोलू ही नही ,
तो तेरी मेरी जिंदगी कैसी ||
तुमझे शर्म ही नही तो ,
मेंरा दिल फिर कैसा |||
तुझपे हक ही नही है मेरा ,
तो बात ही कैसी ,
तू जताती ही नही तो
मेरी लाडली फिर कैसी ,
तुझसे बात ही नही मेरी ,
तब तो तेरा- मेरा इंतजार ही नही ,
तेरा दिल नहीं है तो
फिर मेरा लगाव ही कैसा ||
तुझपे हक ही नही है मेरा ,
तो तेरी मेरी बात कैसी ||||
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