में मतलबी नही ,
पर मुझे बस बना दिया |
में समझादार नही था ,
पर मुशिकलो ने बस समझा दिया ,
दिल दिया था बेमतलब ,
लोगों ने इन्कार कर दिया ||
चाहां था बहुत पर ,
लोगों ने तो धोखा दे दिया था ||
में मतलबी नही था ,
पर मुझे मतलबी बना दिया था ||
हर जगह से रूके हुऐ थे बेमतलब ,
पर ठीक जगह पर ठहरना सीखा दिया था ||
साथ - सभी का दिया था,
पर लोगो ने तो मिट्टी में ही मिला दिया था ||
नजर कया उठाऐ ऐ मेरे दोस्त ,
गददारो से मिलवा दिया था ||
ये अनिल हटरिया है जनाब ,
सब जानता था पर सब्र ने सब कुछ रूकवा दिया था !
में मतलबी तो नही था |
पर लोगो ने मतलबी बना दिया था |||
हरकत से बाज नही थे लोग ,
अपने आप से उपर समझकर बैठे थे ,
चैन की जिंदगी जी रहा था
पर गददारो ने तो प्लान कर रखा था ||
मतलबी लोगो ने तो जाल बिछा रखा था |
पर ताकतवर लोगो ने तो सिर झूका रखा था |
में मतलबी तो नही ,
पर मुझे बस बना दिया था |
में समझादार तो नही था ,
पर मुशिकलो ने बस समझा दिया था |
हर बार की आदत थी ,
मुसकुराकर छोडने की ||
पर अबकी बारी तो
ताकत थी बस लडने की ,
कयोकि में मतलबी नही ,था
पर मुझे तो बस मतलबी बना दिया था |
में मतलबी नही ,
पर मुझे बस मतलबी बना दिया था |
...
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