में चुप हूँ कयोकि मुझे मालूम है || में चुप हूँ इसलिये कि मुझे पता है | हर बात का एहसास है मुझे , इसलिये सभी का पता है |
में चुप हूँ कयोकि मुझे मालूम है ||
में चुप हूँ इसलिये कि
मुझे पता है |
हर बात का एहसास है मुझे ,
इसलिये सभी का पता है |
किनारे पर खडा हूँ ,
देख रहा हूँ ये नजारे ,
तू कही में कही ,
बस सपने पडे है दिल में हमारे ||
ना जानू किसी को ,
ना अनजान हूँ ,
बस खडा हूँ अपने दम पे ,
थोडा सा नादान हू ,
आती है मुझे सब बाते
बतानी और उसे समझनी ,
पर चुप हूँ इसलिये कि
मुझे पता है |
हर बात का है मुझे एहसास है |
इसलिये की कयोकि मुझे सब पता है |
खेल रहा हू अपनी जिंदगी को ,
खेल रहा हू अपनी जिंदगी से ,
मस्त अपने आप में अकेले ,
मस्त अपने आप में ही अकेले ,
ना करता हूँ बेशर्मी ,
जानता हूँ पर अनजान थोडी ही हूँ ||
में चुप हूँ कयोकि मुझे मालूम है ||
में चुप हूँ इसलिये कि
मुझे पता है |
हर बात का एहसास है मुझे ,
इसलिये सभी का पता है |
तो इसलिये सभी का पता है |
में मुड के नही देखता ,हूँ दोबारा
में कह कर चल पडता हूँ
अब ना मिलू गा दोबारा ,,
कयोकि मुझे पता है कि में गलत नही हूँ ,
ना -ना कहने वालो से अलग ही हो जाता हूँ ||
जो एक कदम साथ ना चल सके ,
उसे जिंदगी भर साथ कैसे चला सकता हूँ ||
हर बार की जिद्दी जिंदगी किसी दुसरो से
पुछ - पुछ कर के चला लू ,
ऐसा पागल थोडी ही हूँ ||
में चुप हूँ कयोकि मुझे मालूम है ||
में चुप हूँ इसलिये कि
मुझे सभी का सब पता है |
हर बात का एहसास है मुझे ,
इसलिये तो सभी का पता है |
में चुप हूँ कयोकि मुझे मालूम है ||||
यहाँ से ओर ढेरो सारी कहानिया पढे |
....
..
.

टिप्पणियाँ