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फौजी की पेंशन वो कैसे पाऐगा , काहानी फौजी के कलमो से ✍🏻

 बना ले मन पेंशन जाने का,

 वरना बहुत पछताएगा |

घुटनों में जब जान रहे ना,

 दर-दर ठोकर खाएगा ||


 दे दे कर तू रात की ड्यूटी ,

उल्लू सा बन जाएगा ||

 दिन भर के तू हुकुम मानकर,

 नौकर खुद को पाएगा ||

सीटी बजते ही का उठना,

 झंझट सब खत्म हो जाएगा ||

 बना ले मन पेंशन जाने का ,

वरना बहुत पछताएगा ||


फौजी की काहानी फौजी के कलमो से ✍🏻


 खा खा कर तू अंडे मुर्गी ,

और चना प्लेट भर खाएगा ,

 दो तीन पैग रोज दारू पीकर,

 जब औवर वेट हो जाएगा ||


 मेडिकल का बड़ा है लोचा,

 कितना वेट घटाऐगा ||

  तरकी का  सपना लेकर ,

मन को कितना समझाएगा ||

सुबह शाम सब को बहला कर ,

कितना दौड़ लगाएगा ||


रूखी सूखी खाकर भी तू,

 पूरी मौजूद उडाऐगा ||

 बना ले पेंशन जाने का,

 वरना बहुत पछताएगा ||

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 नकली सितारों की चाहत में ,

कब तक गला कट आएगा ||

जब जब हक की बात करेगा |

 तब तब मारा जाएगा |

 बूढ़े घोड़ों की हालात में ,

1 दिन निकाला जाएगा ,

मनाले पेंशन वरना बहुत पछताएगा ,

फौजी की पेंशन वो कैसे पाऐगा , काहानी फौजी के कलमो से ✍🏻


खुद का बिजनेस करके एक दिन ,

मालिक जब बन जाएगा ||

जाने कितने जरूरतमंद का ,

सहारा तू बन जाएगा ||

 रिश्तेदार भी प्यार करेंगे,

 जब तू नोट उठाएगा ||

बना ले मन पेंशन जाने का ,

वरना बहुत पछताएगा ,

बच्चो का  बन मार्ग -दर्शक, 

उनको राह दिखाएगा ||

 मां बापू की सेवा करने ,

का मौका तू पाएगा ||

 देश का मान बढ़ा कर ,

अब तो घर का फर्ज निभाएगा |

 बना ले मन पेंशन जाने का ,

वरना तू पशताऐगा ||



जय हिंद वंदे मातरम



फौजी की काहानी फौजी के कलमो से ✍🏻



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✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया


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