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वक्त नहीं !! जिंदगी कितनी व्यस्त हो गई है , कि अपने आप के लिए वक्त नहीं ,

 वक्त नहीं !!

जिंदगी कितनी व्यस्त हो गई है ,

कि  अपने आप के लिए वक्त नहीं ,

हर खुशी है लोगों के दामन में,

 पर एक हंसी के लिए वक्त नहीं ,

सो के उठता हूँ रूकने का समय नही ||

वक्त ,समय नही


दिन-रात दौड़ती दुनिया में,

 जिंदगी के लिए वक्त नहीं,

 मां की लोरी का एहसास तो है,

 पर मां को मां कहने का वक्त नहीं ,

मां को हर बार बोलता हूँ 

फोन करूगा पर वक्त नही |


सारे रिश्तो को हम मार चुके हैं,

 अब उन्हें दफनाने का वक्त नहीं ,

सारे नाम मोबाइल में है,

 पर दोस्तों के लिए वक्त नहीं 

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गैरों की क्या बात करें ,

जब अपनों के लिए ही वक़्त नहीं ,

आखों में है नींद बड़ी ,

पर सोने के लिए वक्त नहीं,


 दिल है  गमों से भरा हुआ पर ,

रोने के लिए वक्त नहीं ,

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े ,

की थकने के लिए वक्त नहीं ,

वक्त नहीं !!  जिंदगी कितनी व्यस्त हो गई है ,  कि  अपने आप के लिए वक्त नहीं ,


पराया एहसासों की क्या कदर करें ,

जब अपने सपनों के लिए वक्त नहीं ,

दिल में बहुत बातें हैं बताने के लिए ,

लेकिन बताने के लिए वक्त नहींl

सच तो ये है ना की हम इतने कमजोर हो गये |

कि उठ कर बिस्तर से घूमने का वक्त नही ||

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✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया

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