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अखबार वाले की काहानी (सोच बदलो और अपने आप पर कन्टृोल रखे )|

 अखबार वाले की काहानी (सोच बदलो और अपने आप पर कन्टृोल रखे 

 एक बार की बात है एक गरीब अखबार बेचने भेजने वाला हमारी गली से आया करता था | वह हर रोज सभी को अखबार देकर जाता  था |

एक गरीब अखबार,Poor newspaper wala,


    उसी गली में एक खड़ूस आदमी  रहता था | और अखबार वाला रोज अखबार को धीरे से उसके घर घर पर रख देता था | फिर वहाँ उसको बदले मे पैसे  फैकं कर वापस कर देता था |


     तभी एक दिन उसके साथी ने उससे पूछा तुम रोज इनको अखबार अच्छे से देख कर आते हो और वह तुझे रोज पैसे फेंक कर देता है |  तुम क्यों नहीं कह देते तब उसने बोला मैं तो हमेशा इसको सर कह कर बोलता हूं और इज्जत के साथ पेपर देता हूं पर हम क्या बोले कुछ लोग देश होते ही ऐसे हैं मैं अपने आप को शांत रखता हूं तो फिर तुम उनको अखबार फेंककर  क्यों नहीं बदला ले लेते |

    तब उस अखबार वाले ने उस भैया को बोला कि मैं उसकी गलत व्यवहार से  क्यों अब अपना व्यवहार बदलू वह तो है ही घटिया किस्म का और अपना व्यवस्था |

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   इसलिए रिमोट की तरह मत बनाओ मुझे अपने आप पर कंट्रोल है तो बात यह है कि अपने व्यवहार को अपनी अपनी तरह ही रखी ना किसी के रूखापन कीजिए  |

  प्यार प्रेम से  मित्र करें आरामदायक तन ही मानवता का गुण है इसे अवगुण मत बनाइए और किसी को अब किसी को भी अब आदमी की सुंदरता उसके चेहरे से नहीं उसकी जुबान से देखी जाती है| 

  इसलिये जो करेगा वो ही भुगतेगा | आप अपने आप को ऐसा बनाईऐ कि आप मजबूत के मजबूत रहे और दूसरा कोई कुछ भी बोले ||

एक गरीब अखबार,जैसे करो गे वैसे मत बनो ,



 अत: शीर्षक यह है कि आप कभी भी अपना व्यवहार ना बदले किसी की बातो से और दूसरो के स्वभाव से ||



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✍🏻✍🏻✍🏻अनिल हटरिया




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