जिंदगी की रफतार रफ्तार की दौड फिर से आ गई , बीते दिनो को छोडके अब गाडी की रेस अपने पंजो के नीचे आ गई | मर के जिंदा हूआ , अब जिंदगी की नई. राह आ गई | 13 बीमारियो से बचकर जिंदगी की रफतार अपने पंजो के नीचे आ गई | हर रोड पर मोड ही मोड वही जिंदगी से गिराने की राह आ गई थी | अब रफतार भरी जिंदगी फिर से आ गई है | गिराने वाले तो गिरे हुऐ रह गये है | बाजी मारने के चककर में लोगो के तलवे चाटते फिर गये | जिंदगी की रफतार में कुछ गैर लोग जिंदगी से फिसल गये | मतलबी अपना मकसद में नाकाम रह गये | युद्ध तो लाख किये पर तीर चलाने की बजाये कमान उठाना तो भूल गये , सागर की लहर में नही वो तो घर बैठे बेठे जुबान चलना सीख गये | लोगो को गंदा बताकर ,अपने आप को तो धोना भूल गये , जगह बदली ,पर जगह की दिमाग का कचरा तो निकालना भुल गये , सिखा तो मेने जिंदगी के नये नये आयाम , पर टांग मुडने के बाद भी ये खेल छोडना ना भुल पाया , कमर में लगा दर्द , फिर भी कमाने के लिऐ लाईन से चल दिये , आंख में हुई बहुत दिककत , फिर भी चशमा पहनना भूल गये , क ई क ई बार तो सुबह ...
Emotional Story with My Pain & Tear