सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मजदूर हरि की कहानी !!

 मजदूर हरि की कहानी !!


ये काहानी आपको रुला देगी

प्रणाम सभी को , 
               
                 नमस्कार दोस्तों मैं अनिल हटरिया आज आपके लिए नई कहानी लेकर आया हूँ | यह कहानी है हरि नाम के एक मजदूर की, हरि की उम्र तकरीबन 7 साल थी |
 हरि रामपुर नामक के गांव में रहता था| रामपुर उस समय काफी खुशहाल गावँ था|  गावँ  के लोग बड़े खुशमिजाज थे|  हर कोई अपनी मजदूरी,  खेती, व्यापार इन्हीं चीजों में व्यस्त रहता था| हर साल गांव में मेला होता था,  नए-नए त्योहार मनाए जाते थे|  करीबन 10 साल की उम्र में हरि के माता-पिता उसे छोड़ स्वर्ग सिधार गए थे, तब से हरि अकेला ही जीता था| जहां मिले वहां खाता था, जहां मिले वहां सो जाता था|
   हरि के पिता ने गांव के साहूकार से काफी कर्ज़ लेकर रखा था| वह कर्जा चुकाने के लिए साहूकार ने हरि को अपने यहां काम पर रख लिया था,  हरि के पास ना अपनी खेती थी ना कोई व्यापार था| हरि साहूकार के नीचे काम करते-करते न जाने कब बड़ा हो गया,  अब हरि की उम्र तकरीबन 20 साल थी | पूरी जिंदगी हरि ने अकेले काटी थी| अब उसका मन शादी कर घर बसाने का था| पर मुश्किल तो यह थी हरि जैसे गरीब मजदूर को अपनी लड़की विवाह के लिए कौन देता| हरि ने लड़की ढूंढने की काफी कोशिश की पर हरि से शादी रचाने के लिए कोई भी तैयार नहीं था| दूसरी तरफ हरी की जिंदगी मानो जैसे साहूकार के पास गिरवी रखी थी| दिन बीतते रहे हरि का शादी का ख्याल दिमाग से न जाने कब निकल गया| अब तो बस उसकी  मजदूरी में ही हरि को अपना जीवन व्यतीत करना था|
                      अचानक एक दिन की बात थी, जब हरि रास्ते से जंगलों की ओर गुजर रहा था | रास्ते में उसे एक बुरे हाल मैं औरत नजर आयी,  जो कि काफी फूट-फूट कर रो रही थी|  हरि से रहा ना गया|
    हरि उस औरत की और जा कर पूछा,  ओ बहन आप क्यों रो रहे हो?,  औरतों ने कोई जवाब नहीं दिया और जोर जोर से रोने लगी, और वहां से उठकर दूसरी तरफ चली गई| फिर यह देखकर हरि वहां से जंगल की ओर चला गया|
    दूसरे दिन फिर साहूकार ने हरि को जंगल से लकड़ी लाने का काम दिया था| उसी प्रकार उसी रास्ते से हरि गुजर रहा था की अचानक फिर हरी ने उस औरत को एक जंगल के कोने में रोते हुए फिर से देखा,  इस बार हरि ने ठान लिया कि मैं इस औरत की मजबूरी का कारण पूछ कर ही रहूंगा| हरि औरत के पास गया और पूछने लगा ओ बहना मैं तुम्हारे भाई जैसा हूँ, आप मुझे अपनी मजबूरी बता सकते हो कृपया करें और मुझे अपनी मजबूरी बताएं| मुझे आपका हाल देखा नहीं जा रहा,  औरत धीमी आवाज में बोली, आप यहां से चले जाइए, वरना आप भी मेरी बीमारी के शिकार हो जाओगे| मुझे छूत की बीमारी है, आप कृपया करके यहां से चले जाइए मुझे अकेला छोड़ दीजिए|  काफी पूछताछ के बाद औरत ने हरि को बता ही दिया कि उसके घरवालों ने,  उसके पति ने इस बीमारी के कारण उसे छोड़ दिया है, और उससे अपना नाता तोड़ दिया है| तब से मैं यही जंगलों में भटक रही हूँ, और अपनी मृत्यु का इंतजार कर रही हूँ | यह सब जानने के बाद हरि ने उस औरत के लिए खाने का इंतजाम किया। बारिश के दिन थे हरि ने जंगल में ही उस औरत के लिए एक कुटिया बनाई, हरी  रोज उसके लिए खाना ले जाता और बीमारी से ठीक होने के लिए कुछ दवाई भी ले जाता था|
         दिन बीत रहे थे हरि रोजाना की तरह खाना ले जाता, दवाई ले जाता । 1 दिन साहूकार ने रात के समय हरि को जंगल जाते हुए देखा| साहूकार ने सोचा मैंने तो हरि को किसी प्रकार का काम नहीं दिया फिर वह जंगल क्यों जा रहा है| साहूकार ने अपने कुछ लोगों को हरि के पीछे भेज दिया। साहूकार के लोग हरि का पीछा करते-करते जंगल की ओर पहुंच गये| उन्होंने देखा कि हरी जंगल में कुटिया के अंदर घुस गया नजदीक से सुनने के बाद लोगों को अंदर से एक औरत की आवाज आ रही थी, यह सारी बात साहूकार के लोगों ने शीघ्र ही साहूकार को बता दी| साहूकार सोच में पड़ गया आखिर मामला क्या है, दूसरे दिन साहूकार ने हरिको खेतों में काम करने भेज दिया और उसके लोग जंगल में कुटिया के पास पहुंच गए| औरत को उन्होंने बीमार देखा और जानकारी के बाद पता चला कि यहां भयंकर रोग से संक्रमित हैं| साहूकार ने सरपंच से जाकर मुलाकात की और पूरे गांव में एक ही बवाल मचा दिया कि उस बीमार औरत से हरि के अनैतिक संबंध है और शादी ना होने के कारण उस औरत के साथ जंगल में रहता है| सारे गाँववाले रोग से डरने लगे पर यह बीमारी गाँव  में ना पहुचे यह सोचते हुवे गांव के लोगों ने क्रूर नीति के साथ,  उस औरत को जिंदा ही जला दिया और हरि को हमेशा के लिए गावँ  से बाहर कर दिया| यह बात तूफान जैसी हर गावँ  में फैल चुकी थी| हरि को कोई गावँ  जगह देने की लिए तैयार नहीं था, हरी अब थक चुका था और उसने अब सोचा की जाये तो जाये कहां!
                      फिर वहां जंगल का रास्ता ढूंढता है और जंगल के रास्ते से होते हुए एक पहाड़ पर जाकर पहुंच जाता है| जहां पर हनुमान जी की मूर्ति थी |वहीं पर बसेरा बना लेता है| वहां पर उसे खाने की बहुत दिक्कत होती थी,  जिससे वहां के पेड़ पौधे खाकर अपना गुजारा करता था | कुछ दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा| उसने मंदिर के चारों ओर साफ सफाई करके मंदिर को अच्छा बना दिया था | उसे लगा कि अब यहां पर घंटी की कमी है| वह रात में अपने गावँ  में जाकर गावँ के मंदिर से पूरे घंटिया चोर कर ले आता है और पहाड़ पर मंदिर के चारों ओर घंटिया लगा देता है| जब सुबह गावँ वाले मंदिर में पूजा करने जाते हैं तो उन्हें दिखता है कि घंटियां पूरी गायब हो चुकी है| सभी लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं, अगले ही दिन रात में तूफान आता है और बहुत लोगों को गावँ में घंटियो की आवाज़  सुनाई आती है, जो कि उस पहाड़ से आती है जहां पर हरि ने अपना बसेरा बनाया हुआ था| लोगों का ऐसा एहसास हुआ कि पहाड़ पर कुछ है| गावँ के लोग यह सुनिश्चित करते हैं कि हमें पहाड़ पर जाकर देखना चाहिए कि घंटियो की आवाज कहां से आ रही है| लोग पहाड़ पर जाते है सरपंच के साथ| लोगों को पहाड़ पर आते देख हरि पहाड़ों में बनी गुफाओं में छुप जाता है और वह भयभीत हो जाता कि कहीं उसे किसी ने देख तो नहीं लिया और गावँ वाले उसे  पकड़ने तो नहीं आ रहे हैं, जब  गावँवाले वहां पर पहुंचते हैं तो पाते हैं कि हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है,  घंटिया चारों तरफ लगी हुई है लोग उसे चमत्कार समझ बैठते हैं और सब वहां पर सब  अपना सिर झुका कर भगवान के समक्ष नतमस्तक होते हैं,  जब हरि देखता है यह तो वह भी चकित हो जाता है की यहाँ तो  कुछ और ही हो रहा है|
           जब लोगों को अपने मंदिर की घंटियां यहां पर मूर्ति के पास स्थापित देख लोगों को यह लगा कि यहां पर चमत्कार हुआ है,  तो लोग वहां पर मंदिर बनवा देते हैं,  रोड बनवा देते हैं |जिसे देख हरि भी आश्चर्य में पड़ जाता है और दूसरे गावँ  के लोगों को यह पता चलता है तो कई गावँवाले वहां पर पूजा अर्चना के लिए आते हैं और दान चढ़ावा चढ़ाते हैं यह सब देखकर हरि खुश होता है और उसकी दिनचर्या और अच्छी हो जाती है क्योंकि मंदिर के पास जो भी चढ़ावा चढ़ता है| उसे खाकर वहां अपनी जिंदगी का गुजारा करता है और वहीं पर अपना बसेरा बना कर रहने लग जाता है|
                   

   इसका लिखने का तात्पर्य है कि मानवता जीवन का आधार है,  उसे अंधश्रद्धा या कूटनीति से नष्ट ना करें। अगर सृष्टि ही किसी को जिंदा रखना चाहे तो उसे हम और आप मिटाने वाले कौन हैं|


काहानी अच्छी  लगी तो शेयर जरूर करे |


मेरी ओर कहानियां पढने के लिये यहाँ Click करे !

Click Here For More



________✍✍✍ अनिल हटरिया______ ____






..
..
.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

एक पुरूष थकता नही | एक पुरूष थकता नही है | उसे थकाया जाता है | वो हारता नही पर उसे हराया जाता है |

 एक पुरूष थकता नही | एक पुरूष थकता नही है | उसे थकाया जाता है | वो हारता नही पर उसे हराया जाता है | वो रोता नही है पर रूलाया जाता है | तू एक मर्द है ये कहकर चुप कराया जाता है | घर की सारी जिम्मेदारी दिया जाता है | एक आंसू कया टपका दो किसी के पास , औरत है कया तू ये कहा जाता है | एक मर्द है तू ये समझाया जाता है | सब जिम्मेदारी का एहसास दिलाया जाता है | कमाना भी तू तुझे है | घर भी तुझे ही चलाना है | ये कहकर एक मर्द को हराया जाता है | एक पुरूष थकता नही है , पर फिर भी उसे थकाया जाता है | तुझे पढकर आगे जाना है | कही कलम की नौकरी तो कही मजदूरी करवाया जाता है | एक मर्द थकता नही , पर फिर भी परिवार के तानो से थकाया जाता है | ये तो सब देखा हुआ है , तू कया अलग घूमाया मुझे  ऐसे ऐसी जगह तो घुमी हुई है | कहकर लोगो को भी सुनाया जाता है | अपने आप को बडा मानते है लोग , जिनकी जेब नही है दस से ज्यादा कया नोट  कहकर ये लोगों को बढाया जाता है | अकसर जिन्हे देखी ही नही मेहनत की वो  राते , वो अकसर रातो रात खबाबो के सपने सजाते है | मर्द थकते नही उन्हे थकाया जाता है | ये कह कहकर घर तेरे हाथ मे...

"भाई की शादी "मे 'बहन का जलवा'

 "भाई की शादी "मे 'बहन का जलवा'     शादी तो लाखो देखते है पर एक बहन को जोश तब ही आता है जब वह बोलती है भाई की शादी मे देखना मुझे  😛🙄      बहन की इस काहानी मे , मै आपको बताऊगा की एक बहन कया कया सोचती है उसके भाई की शादी मे ||      चलो आरम्भ करते है |   बहन , बचपन से बहुत अच्छा साथी होती है उसके भाई के बारे मे वह सब कुछ जानती है || Click Here To Buy   ओर सब अच्छे बुरे के बारे मे जानती है की भाई को कैसे स़ंभाला जाता है|    एक बहन अपने भाई के बारे मे ये बहुत सोचती है कि किस दिन मे अपने भाई के लिए एक सुंदरी ढूंढूगी |   और किस दिन वो समय आऐगा | जब मे भाई की शादी मे जाऊगी |     भाई के शादी मे बस दिखता है तो बस एक ही दिखता है तो वो है  भाई की बहन ||    सब से अलग दिखने के लिए बहन अपने भाई से बोलकर   सबसे अच्छी डै्स खरीदती है और बौलती है देखना मुझे मे सबसे अलग ही दिखूगी || टशन से चलूंगी |  मेरा फोटू सबसे बढिया आऐगा और सभी देखेगे |सभी भाई देखना फोटू खिचवाने आऐगे की हमारी ...

मुझे आशिकी नही आती , मुझे निभाना आता हे | मुझे गिरना नही है और मुझे किसी को गिराना भी नही ||

 मुझे आशिकी नही आती , मुझे निभाना आता हे | मुझे गिरना नही है   और मुझे किसी को गिराना भी नही || बात कम करता हू , पर मुझे छूपाना नही आता | घर की हर बात याद है मुझे , तेरी बाहौ में मुझे अब चैन नही आता | मुझे आशिकी नही आती | मुझे निभाना आता है | मुझे तो बस समझाना आता हे | गलत आदमी से बात नही | बस गलतियों से सिखना आता हे | सच बताऊ मुझे आशिकी नही आती | काहानी लिखी  है मैने मेरे कलमो से , काहानी लिखी  है मैने मेरे कलमो से , किसी की फालतू कहनी नही आती | मुझे गिरना नही और गिराना भी नही आता , बात कम करता हू , पर छूपानी नही आती | मुझे आशिकी नही आती | सच में काहानी तो लाखो लिख दू , पर झूठी मुठी बाते कहनी नही आती || पर मे  तेरे जैसे का जिक्र नही करता | पर मे  तेरे जैसे का जिक्र नही करता | Buy Now तू सच हो या झूठ , मुझे बताना नही आता , मे आशिकी नही करता , में समझता हू हर बात | किसी को गलत कहना नही आता | मुझे आशिकी नही आती , मुझे निभाना आता हे | मुझे गिरना नही है   और मुझे किसी को गिराना भी नही आता , बात कम करता हू , पर छूपाना नही आता | मुझे आशिकी नही आती ...

तू मुझसे प्यार कयो करती है , कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता है | तू मुझसे रूठ कयो जाती है , मुझे तो मनाना नही आता |

 तू मुझसे  प्यार कयो करती है  , कयोकि मुझसे तो निभाना ही  नही आता है | तू मुझे रूठ कयो जाती है , मुझे तो  मनाना नही आता | हर बार तेरे झूठे नखरे को उठाना नही आता | गलती को गलत ही कह देता हूँ | झूठ को सच कहना नही आता | तूजे कया बताऊ , हर बात को बताना नही आता | तू मुझसे प्यार का कयो करती है , कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता | झूठे को सच बताना नही आता , हर बार एक ही बात को बताना नही आता | बस बोल दिया है प्यार तुमसे है  रोज रोज मुझे कहना नही आता || मेरे रास्तों में मोड है बहुत , कस के पकड लो कयोकि मुझे छोडना नही आता || सुंदर तो बहुत लोग है आस और पास में  पर तेरे को गंदा कहना नही आता || तू मुझसे  प्यार कयो करती है  , कयोकि मुझे तो निभाना नही आता है | तू मुझे रूठ कयो जाती है , मुझे मनाना नही आता || सच्ची बात है ,एक साथ हू  सच्ची बात है ,एक साथ हू  पर मुझे किसी को झुकाना नही आता , मानता हू, में रहूंगा अकेला  पर हर बात को दिल पर रखकर सोना नही आता | चल के उठ पडता हूँ हर  वो गैरो के पास से , कयोकि हर बार बेजजती नही सह पाता| | कुछ समय...

मुझे इतना इंतजार कयू है | जब तुम बात ही नही करना चाहता है तो फिर मेरा इंतजार ही कयू है | जब तू मुझसे प्यार ही नही करता , तो फिर तेरा मेरा ये इंतजार कयू है |

 मुझे इतना इंतजार कयू है | जब तुम बात ही नही करना चाहता है  तो फिर मेरा इंतजार ही कयू है | जब तू मुझसे प्यार ही नही करता , तो फिर तेरा मेरा ये  इंतजार कयू है | जब तेरे को मेरी परवाह ही नहीं है , तो तेरे प्रति मेरा प्यार कयू हे , तू हमे चाहता ही नही है तो  मुझे तुम पर इतना इतबार कयू है | तू हर बार की तरह चाहता ही है तो  फिर तुझे मेरे पर विश्वास कयो नही है | तु मुझसे बात ही नही करना चाहता तो  मेरी आँखो मे तेरे  इंतजार कयू है || Buy Now हर बार पुछता हूँ , तुम जो मुझे जवाब देना ही नही चाहता तो  मेरे पास इतने सवाल कयू है | हर बार पुछता हूँ  फिर भी तेरा जबाब कयू नही है || हर बार प्यार की बात में ही करू , तो फिर सिर्फ तुमसे ही प्यार कयू है | तुझे मेरी चाहत ही नही तो  फिर मुझे छोडने का इतना हक कयू नही | मुझे इतना इंतजार कयू है | जब तुम बात ही नही करना चाहता है  तो फिर मेरा इंतजार ही कयू है | जब तू मुझसे प्यार ही नही करता , तो फिर तेरा मेरा ये  इंतजार कयू है | हर बात को बहकता बहकता दिखाता है | पर तेरी  आदत मे सुधार कयू नही है | तू ...

चंचल सा चेहरा तेरा , निखरती है आंखो की पलके तेरी , बेटी है तू मेरी -हिमांशी 😘😘

 चंचल सा चेहरा तेरा , निखरती है आंखो की पलके तेरी , बेटी है तू मेरी ,बेटी  है तू मेरी  सुबह उठ जाती है , अपने आप , चल पडती है आने को मेरे पास , लाडली है तू मेरी , छोटी सी जान है मेरी , राह की निहारती है नजर तेरी , हंसती हुई हिंमाशी तू बहुत अच्छी लगती है | गालो की थोडी सी मलाई मुझे दे दे | कभी तू भी मेरे दुख को भुला दे . चंचल सा चेहरा तेरा , निखरती है आंखो की पलके तेरी , मुझे थोडा सा प्यार की घूंट पिला दे | जब दर्द लगे तो मुझे बुला ले , औ मेरी नन्ही ही सी हिंमाशी   मुझे डांस कर के दिखा दे, आया हू तेरे जन्मदिन पर भी  मुझे भी तेरी तीन मोमबत्ती बुझाने दे | मुझे भी तीन मोमबत्ती बुझाने दे | चल पडा हू अब तुझे छोड के  मुझे आज डयूटी पर जाने दे | हो गई छूटटी पूरी अब तो  मुझे भी अपनी फौज की नौकरी में जाने दे | Buy Now याद तो आऐगी तेरी बेटी , पर तू खुशी से अपना जन्मदिन मना लेना | औ मेरी हिमांशी तू अब जल्दी सी  बडी हौजा | पढ लिख कर कुछ अपना करने कोशिश कर , चंचल सा चेहरा तेरा , निखरती है आंखो की पलके तेरी , महकती है गर्भ वाली महक तेरी , तंगा रखे है कपडे ...

बहन की 😭विदाई 😓😭

  बहन की 😭विदाई 😓😭   बहन बहुत याद आती है जब मैने अपने हाथ से तेरा हाथ  दुसरे के हाथो मे पकडा दिया |  बस एक बात सोचकर की मेरी बहन खुश रहेगी और कोई कभी दुख नहीं देखेगी |        बहन की शादी से पहले मे ये बोलता था कि मै नही रोऊगा , नही शादी मे ,आखिर कयो वो दिन  कयो आ जाता है | कि एक कदम और एक सांस तक नही बोली जाती |     बहन  बस अब वो दिन ही याद आता है कि आपको अपने घर से जब स्टेज तक चार भाई आपको किसी के हवाले कर देते है |       आप कैसे चल रहे थे  ये तो पता नही पर मेरे पाव आगे नही फट रहे थे| और 20 कदम चलना इतना मुशिकल था | जैसे कि हम कहा और किस रास्ते पर जा रहै है |       जब हमने अपनी बहन को किसी के हाथ मे हाथ रखवाकर उनको स्टेज पर बिठा दिया | ये नही पता था कि वो कैसे होगे और किस तरह के होगे | पर कैसे रहेगी मेरी बहन 😥|       बहन जब वो मंडप पर सात चक्कर लगवाना तब तब ये लगता था कि कितना सच करेगे और कितने सच रहेगी|     बहन एक  वो जब पडिंत के दवारा चार वर को मनवाना ...

आखिर दाग लग ही जाते है | सफेद रंगो मे ही नही, गहरे रंगो में भी दाग दिख जाते है |

 आखिर दाग लग ही जाते है | सफेद रंगो मे ही नही,  गहरे रंगो में भी दाग दिख जाते है | सच बताऊ तो  तुम चाहे कितना अच्छा बन लो  कुछ लोग दाग लगा ही देते है | तुम चाहे दिल जान लगाकर  चाह लो , लोग दुसरो की तरफ रूह  मोड ही लेते है | में अपनी कहानियों में ही नही लिखता  ब्लकि अपना दर्द , हर दर्द को वो  लोग झूठा बता ही देते है | कुछ लोग सच्चे को झूठा बता ही जाते है | दिन को भी रात बता देते हे | आखिर दाग लग ही जाते है | गहरे रंगो में भी नजर पड जाते है | अपनी पहुँच उच्ची रख करके  लोगो . को बेकूफ समझ जाते है | कभी कभी सफेद कपडों में ही नही , गहरे रंगों मे भी दाग पड जाते है || कभी कभी लोग मीठे बनकर, एहसान करने लग जाते है | सच्ची बात तो ये है कि , मुर्ख़ लोग भी सब समझ जाते है | आखिर दाग लग ही जाते है | सफेद रंगो मे ही नही,  गहरे रंगो में भी दाग दिख जाते है | कैसे कह दू , फर्क नही पडता दाग से , आखिर लोग दगा देकर भी  अपने घाव को छूपा जाते है || आखिर लोग आखमिचोली खेल ही जाते है | धोखा देने की हद ही नही , अपने आप को राम से बडा मान जाते है | आखिर लोग दाग...

मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी |

 मैने इज्जत की थी और  तुने रोटी भी ना दी थी | मैने इज्जत की थी और  तुने रोटी भी ना दी थी || मे सब जगह जीता हूँ  और हर जगह जीत भी रहा हू  || घमंड नही है मुझे एक पैसे का भी , कयोकि मैने इज्जत दी थी || तूने रोटी भी ना दी और मैने अपना घर भी दे दिया था | तूने पूछा भी ना था दर्द मेरा कभी , पर  तूने दर्द ऐसा दे दिया था || उबलते पानी को घाव पर डाल  दिया था  || अकड थी बहुत तुझमे , की झुका देगे तुझे झूठी बातो में ,, की झुका देगे तुझे झूठी बातो में , पर मैने इज्जत की थी | और तुने रोटी भी ना दी थी | में जीता हूँ हर जगह जगह , और जीत भी रहा हु , हारूगा नही याद है मुझे , कयोकि मैने इज्जत दी थी || कयोकि मैने इज्जत की थी || पुछकर - पुछकर हर बात किसी से  घर नही चलता , अकल नही है जिसको थोडी सी भी , वहाँ मर्द नही रूकता || कयोकि वहाँ मर्द नही रूकता || गंदे  दिल में मन नही लगता || सच्ची बात में मोहबबत होती है | सच्ची बात में मोहबबत होती है | हर  बार बात को  दबाने से घर नही बसता , मैने कहा था उसको , रोका नही उसको कभी भी , कही पर और घर में भी , मैने क...

365 दिन की दिन की वो राते याद हे मुझे 365 दिन की वो राते , तनहाई में कटी थी वो दिन की राते , रोकर भी अपने आप को चुप कराई की थी बाते ,

 365 दिन की दिन की वो  राते  याद हे मुझे 365 दिन की वो राते , तनहाई में कटी थी वो दिन की राते  , रोकर भी अपने आप को चुप कराई की थी बाते , कोई नही अगले दिन तो होगा ना सवेरे ये कहकर  बस पलके थी ना समेटी  , याद तो हे ना तुझे भी मेरी वो तनहाई वाली राते , सुबह उठकर देखा था ,तो पलके तो थी ही वैसे  पर टपकी की आंखे , कहती थी चल पडता हू में , कहती थी चल पडता हू में , ये कहकर वो मेरी आंखे , याद तो हे तुझे मेरी 365 दिन की वो राते , याद हे तुझे मेरी 365 दिन की ,  चीख वाली राते , कहकर अब चला हू , हर काहानी में अपना दर्द लिखा हू , ना किसी से कहू  बस , अपने आप को लिखता हूँ , ना किसी से मदद ली , ना किसी का बुरा भला किया | अपनी ही रातो में कटी थी तनहाई की राते , बदले -थे -बदले अपने वो सलिके , हर कदम पर ठोस मिला हू , तनहाई में इतना दर्द सहा हूँ , ना किसी को गलत कहा, ना किसी की अपमानित किया हू  , बस अपनी लाईन में चला हू | हर काहानी में मैने बहुत दर्द  लिखा  है | कदम- कदम पर अपना काम और नाम लिखा हे | ना किसी से की गैरौ वाली मोहबबते, बस अपनी नियति ...