मुझे आशिकी नही आती ,
मुझे निभाना आता हे |
मुझे गिरना नही है
और मुझे किसी को गिराना भी नही ||
बात कम करता हू ,
पर मुझे छूपाना नही आता |
घर की हर बात याद है मुझे ,
तेरी बाहौ में मुझे अब चैन नही आता |
मुझे आशिकी नही आती |
मुझे निभाना आता है |
मुझे तो बस समझाना आता हे |
गलत आदमी से बात नही |
बस गलतियों से सिखना आता हे |
सच बताऊ मुझे आशिकी नही आती |
काहानी लिखी है मैने मेरे कलमो से ,
काहानी लिखी है मैने मेरे कलमो से ,
किसी की फालतू कहनी नही आती |
मुझे गिरना नही और गिराना भी नही आता ,
बात कम करता हू ,
पर छूपानी नही आती |
मुझे आशिकी नही आती |
सच में काहानी तो लाखो लिख दू ,
पर झूठी मुठी बाते कहनी नही आती ||
पर मे तेरे जैसे का जिक्र नही करता |
पर मे तेरे जैसे का जिक्र नही करता |
तू सच हो या झूठ ,
मुझे बताना नही आता ,
मे आशिकी नही करता ,
में समझता हू हर बात |
किसी को गलत कहना नही आता |
मुझे आशिकी नही आती ,
मुझे निभाना आता हे |
मुझे गिरना नही है
और मुझे किसी को गिराना भी नही आता ,
बात कम करता हू ,
पर छूपाना नही आता |
मुझे आशिकी नही आती ,
मुझे निभाना आता हे ||
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