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मुझे आशिकी नही आती , मुझे निभाना आता हे | मुझे गिरना नही है और मुझे किसी को गिराना भी नही ||

 मुझे आशिकी नही आती ,

मुझे निभाना आता हे |

मुझे गिरना नही है 

 और मुझे किसी को गिराना भी नही ||

मुझे आशिकी नही आती ,  मुझे निभाना आता हे |  मुझे गिरना नही है    और मुझे किसी को गिराना भी नही ||


बात कम करता हू ,

पर मुझे छूपाना नही आता |

घर की हर बात याद है मुझे ,

तेरी बाहौ में मुझे अब चैन नही आता |

मुझे आशिकी नही आती |

मुझे निभाना आता है |

मुझे तो बस समझाना आता हे |

गलत आदमी से बात नही |

बस गलतियों से सिखना आता हे |

सच बताऊ मुझे आशिकी नही आती |

काहानी लिखी  है मैने मेरे कलमो से ,

काहानी लिखी  है मैने मेरे कलमो से ,

किसी की फालतू कहनी नही आती |

मुझे गिरना नही और गिराना भी नही आता ,

बात कम करता हू ,

पर छूपानी नही आती |

मुझे आशिकी नही आती |

सच में काहानी तो लाखो लिख दू ,

पर झूठी मुठी बाते कहनी नही आती ||

पर मे  तेरे जैसे का जिक्र नही करता |

पर मे  तेरे जैसे का जिक्र नही करता |

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तू सच हो या झूठ ,

मुझे बताना नही आता ,

मे आशिकी नही करता ,

में समझता हू हर बात |

किसी को गलत कहना नही आता |

मुझे आशिकी नही आती ,

मुझे निभाना आता हे |

मुझे गिरना नही है 

 और मुझे किसी को गिराना भी नही आता ,

बात कम करता हू ,

पर छूपाना नही आता |

मुझे आशिकी नही आती ,

मुझे निभाना आता हे ||





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✍🏻✍🏻✍🏻 अनिल हटरिया

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