ऐसे ही नही लिखी जाती कहानियां रूह कांप जाती है || भरे समुंदर में भी बाढ आ जाती है | कथन लिख लिखकर आंखे जाग उठती है | सोचने से ज्यादा रूह कांप जाती है | लिखने से पहले ही अपनो की ही , आंखे भर उठती है || कहानियां दिल से लिखे तो दर्द जगा देती है | तन और मन से लिखे हुऐ तो रूह को कंपा देती है | ऐसे ही नही लिखी जाती लाईने , ऐसे ही नही होता वो मात्रा का मिलान , कयोंकि इसके हर काहानी में होता है रूह का संसार , हटरिया लिखता है तो शांत बैठकर , पर कांप जाते लोग इसका रूह देखकर , बनावटी नही बनाते कहावे में ही नही , हम ऐसे वैसे गीत नही गाते , जहाज की उठान से भी ज्यादा , काहानी में रुह कांपते , मंजिल की धडकन में इनके दिल नही कांपते , आगे कदम रखकर भी पीछे कदम नही टिकते , काहानी में कहां दम लगे ,लोग पढकर सैकंडो में ही दूर फैकते | Buy Now बन तो जाती है शायर और शायरिया , जिनको आते है शायरो की मात्रा,का मिलान, जिनको मिलती है भावानाऐं , वो लिख बैठते है रूह कांप ने वाली कहानियां , ऐसे ही नही लिखी जाती कहानियां, रूह कांप जाती ...
Emotional Story with My Pain & Tear