तू मुझसे प्यार कयो करती है , कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता है | तू मुझसे रूठ कयो जाती है , मुझे तो मनाना नही आता |
तू मुझसे प्यार कयो करती है , कयोकि मुझसे तो निभाना ही नही आता है | तू मुझे रूठ कयो जाती है , मुझे तो मनाना नही आता | हर बार तेरे झूठे नखरे को उठाना नही आता | गलती को गलत ही कह देता हूँ | झूठ को सच कहना नही आता | तूजे कया बताऊ , हर बात को बताना नही आता | तू मुझसे प्यार का कयो करती है , कयोकि मुझे तो निभाना ही नही आता | झूठे को सच बताना नही आता , हर बार एक ही बात को बताना नही आता | बस बोल दिया है प्यार तुमसे है रोज रोज मुझे कहना नही आता || मेरे रास्तों में मोड है बहुत , कस के पकड लो कयोकि मुझे छोडना नही आता || सुंदर तो बहुत लोग है आस और पास में पर तेरे को गंदा कहना नही आता || तू मुझसे प्यार कयो करती है , कयोकि मुझे तो निभाना नही आता है | तू मुझे रूठ कयो जाती है , मुझे मनाना नही आता || सच्ची बात है ,एक साथ हू सच्ची बात है ,एक साथ हू पर मुझे किसी को झुकाना नही आता , मानता हू, में रहूंगा अकेला पर हर बात को दिल पर रखकर सोना नही आता | चल के उठ पडता हूँ हर वो गैरो के पास से , कयोकि हर बार बेजजती नही सह पाता| | कुछ समय...