मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी | मैने इज्जत की थी और तुने रोटी भी ना दी थी || मे सब जगह जीता हूँ और हर जगह जीत भी रहा हू || घमंड नही है मुझे एक पैसे का भी , कयोकि मैने इज्जत दी थी || तूने रोटी भी ना दी और मैने अपना घर भी दे दिया था | तूने पूछा भी ना था दर्द मेरा कभी , पर तूने दर्द ऐसा दे दिया था || उबलते पानी को घाव पर डाल दिया था || अकड थी बहुत तुझमे , की झुका देगे तुझे झूठी बातो में ,, की झुका देगे तुझे झूठी बातो में , पर मैने इज्जत की थी | और तुने रोटी भी ना दी थी | में जीता हूँ हर जगह जगह , और जीत भी रहा हु , हारूगा नही याद है मुझे , कयोकि मैने इज्जत दी थी || कयोकि मैने इज्जत की थी || पुछकर - पुछकर हर बात किसी से घर नही चलता , अकल नही है जिसको थोडी सी भी , वहाँ मर्द नही रूकता || कयोकि वहाँ मर्द नही रूकता || गंदे दिल में मन नही लगता || सच्ची बात में मोहबबत होती है | सच्ची बात में मोहबबत होती है | हर बार बात को दबाने से घर नही बसता , मैने कहा था उसको , रोका नही उसको कभी भी , कही पर और घर में भी , मैने क...
Emotional Story with My Pain & Tear